हजारीबाग लैंड स्कैम: IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, लेकिन जेल से तुरंत राहत नहीं

हजारीबाग लैंड स्कैम मामले में IAS विनय चौबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन उन्हें तत्काल जेल से राहत नहीं मिली। जानिए पूरे मामले की ताज़ा अपडेट,

Vinay Kumar Choubey से जुड़े कथित जमीन घोटाला मामले में बड़ी कानूनी अपडेट सामने आई है। जानकारी के अनुसार, Supreme Court of India ने उन्हें जमानत दे दी है।

रांची: झारखंड के चर्चित हजारीबाग जमीन घोटाले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। शीर्ष अदालत के इस फैसले को उनके लिए आंशिक राहत माना जा रहा है, क्योंकि गंभीर मामलों में मिली शर्तों के चलते उनकी तत्काल रिहाई संभव नहीं है। वे अभी भी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ एक अन्य बड़े मामले की सुनवाई लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, लेकिन लगाईं सख्त शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने हजारीबाग जमीन घोटाले से जुड़े मामले में विनय चौबे को जमानत देते हुए कई सख्त शर्तें लागू की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वे बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जा सकते। इसके अलावा उन्हें मामले से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क करने या उन्हें प्रभावित करने से सख्त मनाही है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देना अनिवार्य होगा। यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो उनकी जमानत तुरंत रद्द की जा सकती है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद विनय चौबे को तत्काल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। इसका कारण यह है कि उनके खिलाफ एक और बड़ा मामला—झारखंड का कथित शराब घोटाला—भी विचाराधीन है। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, जब तक सभी मामलों में जमानत नहीं मिलती, तब तक आरोपी को न्यायिक हिरासत में ही रहना पड़ता है। इसी वजह से चौबे फिलहाल रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) में ही रहेंगे।

हजारीबाग जमीन घोटाला क्या है?

यह मामला झारखंड के हजारीबाग जिले में सरकारी और प्रतिबंधित जमीनों के कथित अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। आरोप है कि जब विनय चौबे जिले में उपायुक्त (DC) के पद पर तैनात थे, तब उनके कार्यकाल में भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत के जरिए कई सरकारी जमीनों का नियमों के खिलाफ म्यूटेशन और बिक्री की गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपा गया। यह घोटाला राज्य के सबसे बड़े भूमि विवाद मामलों में गिना जाता है।

शराब नीति घोटाले में भी गंभीर आरोप

विनय चौबे पर केवल जमीन घोटाले ही नहीं, बल्कि झारखंड के बहुचर्चित शराब नीति घोटाले में भी गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने उत्पाद सचिव रहते हुए नई शराब नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई, जिससे कथित तौर पर चुनिंदा निजी समूहों को लाभ पहुंचा और राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ।

इसी मामले के चलते उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और यही मुख्य कारण है कि उन्हें फिलहाल जेल से राहत नहीं मिल पाई है। 1999 बैच के झारखंड कैडर के आईएएस अधिकारी विनय चौबे कभी राज्य प्रशासन के बेहद प्रभावशाली अफसरों में गिने जाते थे। वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।

लेकिन भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच ने उनके करियर को बड़ा झटका दिया। धीरे-धीरे वे प्रशासनिक सेवा से निलंबित होकर जेल तक पहुंच गए।

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