देशभर के IIT संस्थानों में इस वर्ष 600 से अधिक नई सीटें जोड़ी गई हैं। सीटों की कुल संख्या बढ़कर 18,826 हो गई है। इसके साथ ही छात्रों की बदलती जरूरतों को देखते हुए कई नए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।
नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अच्छी खबर है। शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए देशभर के IIT संस्थानों में 600 से अधिक नई सीटें जोड़ी गई हैं। सीटों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ कई नए और भविष्य की तकनीकों पर आधारित कोर्स भी शुरू किए गए हैं, जिससे छात्रों को अधिक अवसर मिल सकेंगे।
IIT संस्थानों में बढ़ी सीटों की संख्या
देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में हर साल लाखों छात्र प्रवेश पाने का सपना देखते हैं। हालांकि सीमित सीटों के कारण केवल चुनिंदा छात्रों को ही प्रवेश मिल पाता है। ऐसे में इस वर्ष सीटों की संख्या में हुई वृद्धि छात्रों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, देशभर के IIT संस्थानों में 600 से अधिक नई सीटें जोड़ी गई हैं। पिछले वर्ष तक जहां कुल सीटों की संख्या 18,160 थी, वहीं अब यह बढ़कर 18,826 हो गई है। इससे अधिक छात्रों को देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।
IIT जोधपुर और IIT मंडी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
नई सीटों के वितरण में IIT जोधपुर सबसे आगे रहा है। संस्थान में कुल 140 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इसके अलावा IIT मंडी में 120 अतिरिक्त सीटों की वृद्धि की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती तकनीकी मांग और उच्च शिक्षा में छात्रों की बढ़ती रुचि को देखते हुए सीटों का विस्तार आवश्यक था। इससे न केवल छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे बल्कि देश में तकनीकी शिक्षा का दायरा भी और मजबूत होगा।
नए दौर की जरूरतों के अनुसार शुरू हुए कोर्स
सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ IIT संस्थानों ने कई नए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इस वर्ष विभिन्न IITs में कुल 18 नए कार्यक्रम जोड़े गए हैं, जिनका फोकस उभरती हुई तकनीकों और उद्योगों की जरूरतों पर है।
IIT कानपुर ने इंटेलिजेंट सिस्टम्स कार्यक्रम शुरू किया है, जबकि IIT मंडी ने क्वांटम साइंस एंड इंजीनियरिंग जैसे आधुनिक क्षेत्र में नया कोर्स शुरू किया है। IIT इंदौर ने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और डेटा साइंस से जुड़े कार्यक्रमों को विस्तार दिया है।
इसके अलावा IIT मंडी में केमिकल और एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग के साथ डेटा एनालिटिक्स को जोड़ा गया है। यह बदलाव इस बात को दर्शाता है कि आने वाले समय में इंजीनियरों को पारंपरिक तकनीकी ज्ञान के साथ डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कौशल की भी जरूरत होगी।
भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए कार्यक्रम
कई IIT संस्थानों ने ऐसे कोर्स शुरू किए हैं जो सीधे तौर पर भविष्य की वैश्विक चुनौतियों और उद्योगों की मांग से जुड़े हैं। IIT धारवाड़ ने गणित और भौतिकी में विज्ञान आधारित कार्यक्रम शुरू किए हैं। वहीं IIT इंदौर ने पर्यावरण अर्थशास्त्र और सतत इंजीनियरिंग जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया है।
IIT पलक्कड़ में मैटेरियल्स इंजीनियरिंग और IIT खड़गपुर में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए तैयार करना और उन्हें नई तकनीकों के साथ काम करने के योग्य बनाना है।
छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, सीटों की संख्या बढ़ने और नए कोर्स शुरू होने से छात्रों को अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार बेहतर विकल्प मिलेंगे। साथ ही उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए कार्यक्रम रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगे।
IIT संस्थानों में बढ़ी सीटें और नए कार्यक्रम भारतीय तकनीकी शिक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। इससे देश के अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के अवसर प्राप्त होंगे।










