World Inequality Report 2026 के अनुसार भारत में टॉप 10% लोगों के पास देश की 65% संपत्ति है, जबकि नीचे के 50% के पास केवल 6.4% Wealth है। आय और संपत्ति में बढ़ती खाई आर्थिक असमानता की गंभीर स्थिति को दर्शाती है।
Income Gap Report: भारत में आर्थिक असमानता एक बार फिर सुर्खियों में है। World Inequality Report 2026 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश की संपत्ति और आय का बड़ा हिस्सा अब भी बहुत छोटे, विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग के पास केंद्रित है। यह रिपोर्ट न केवल भारत की स्थिति को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर भी असमानता तेज़ी से बढ़ रही है। रिपोर्ट को अर्थशास्त्री लुकास चैंसेल, रिकार्डो गोमेज़-कारेरा, रोवाइदा मोश्रिफ और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थॉमस पिकेट्टी ने तैयार किया है।
भारत में संपत्ति की असमानता: 10% लोगों के पास 65% Wealth
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल राष्ट्रीय संपत्ति का 65 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों के पास है। वहीं नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के पास मात्र 6.4 प्रतिशत संपत्ति मौजूद है। यह अंतर दर्शाता है कि आर्थिक विकास के फायदों का लाभ समाज के निचले वर्गों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भारत के टॉप 1 प्रतिशत लोग देश की 40 प्रतिशत संपत्ति के मालिक हैं। यानी एक बेहद छोटे वर्ग ने देश के संसाधनों पर असामान्य रूप से अधिक पकड़ बना रखी है।
यह तस्वीर बताती है कि आर्थिक प्रगति के बावजूद धन का वितरण असंतुलित बना हुआ है और मध्यम वर्ग तथा गरीब तबकों की संपत्ति बेहद सीमित है।
आय में भी बड़ा अंतर: कमाने की क्षमता में भारी खाई
रिपोर्ट यह भी बताती है कि आय के मामले में भी असमानता गहराई से मौजूद है।
- टॉप 10% लोग देश की कुल आय का 58% कमाते हैं।
- नीचे के 50% लोगों को सिर्फ 15% आय प्राप्त होती है।
यानि काम करने, कमाने और जीवन स्तर सुधारने की क्षमता में तेज़ी से अंतर बढ़ रहा है।
2014 से 2024 के बीच आय असमानता में मामूली वृद्धि भी दर्ज की गई। टॉप 10% और बॉटम 50% के बीच आय का अंतर 38% से बढ़कर 38.2% हो गया। यह वृद्धि भले ही छोटी लगे, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि आर्थिक लाभ ऊपर के वर्गों में ज्यादा जमा हो रहे हैं।
महिलाओं की आर्थिक स्थिति: भागीदारी अब भी बेहद कम
World Inequality Report 2026 में महिलाओं से जुड़ा डेटा भी गंभीर तस्वीर प्रस्तुत करता है।
भारत में औसत प्रति व्यक्ति सालाना आय लगभग 6200 यूरो, जबकि औसत संपत्ति करीब 28,000 यूरो आंकी गई है।
इसके बावजूद भारतीय महिलाओं की श्रम भागीदारी (workforce participation) बहुत कम है।
- सिर्फ 15.7% महिलाएं ही नौकरी या किसी आर्थिक गतिविधि में हिस्सा लेती हैं।
- पिछले 10 वर्षों में इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1980 में भारत की बड़ी आबादी मध्यम वर्ग में थी, लेकिन अब इसका एक बड़ा हिस्सा निचले 50% समूह में खिसक गया है। इसका मतलब है कि मध्यम वर्ग सिकुड़ रहा है और आर्थिक सुरक्षा कम हो रही है।
दुनिया में असमानता का स्तर: सिर्फ 60,000 लोग रखते हैं तीन गुना संपत्ति
वैश्विक स्थिति भी बेहद असंतुलित है। रिपोर्ट कहती है कि दुनिया की कुल संपत्ति ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुकी है, लेकिन इसका बड़ा भाग बहुत कम लोगों के पास केंद्रित है।
- दुनिया की आबादी के सिर्फ 60,000 लोग (0.001%) जितनी संपत्ति रखते हैं, वह दुनिया के नीचे के आधे हिस्से से तीन गुना ज़्यादा है।
- सबसे अमीर 0.001% लोगों की संपत्ति 1995 में 3.8% थी, जो 2025 में बढ़कर 6.1% हो जाएगी।
- वहीं दुनिया के आधे गरीब लोगों की कुल संपत्ति पिछले 20 साल से 2% पर ही अटकी हुई है।
यह बताता है कि ग्लोबल विकास के लाभ भी सीमित लोगों तक ही सीमित रह रहे हैं।
कार्बन उत्सर्जन में भी योगदान का अंतर: अमीर वर्ग सबसे आगे
रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में संपन्न वर्ग की भूमिका सबसे अधिक है।
- दुनिया की गरीब आधी आबादी कुल कार्बन उत्सर्जन का सिर्फ 3% हिस्सा बनाती है।
- वहीं सबसे अमीर 10% लोग 77% कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।
यानी आर्थिक संसाधनों पर कब्जे के साथ-साथ पर्यावरणीय दबाव भी समाज के कमजोर समूहों पर अधिक पड़ता है। अमीर लोगों की लाइफस्टाइल और निवेश दोनों ही जलवायु संकट को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
वर्ल्ड इनइक्वैलिटी रिपोर्ट 2026
यह रिपोर्ट 2018 और 2022 के बाद तीसरा संस्करण है और इसे 200 से अधिक वैश्विक शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है। यह रिपोर्ट न केवल असमानता के आंकड़े पेश करती है, बल्कि यह भी बताती है कि आने वाले समय में इस खाई को पाटने के लिए नीतिगत सुधार कितने जरूरी हो जाते हैं।








