देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (HMU) जल्द ही सोनीपत और जींद के बीच अपना पहला व्यावसायिक संचालन शुरू करने जा रही है। डीजल मल्टीपल यूनिट (DMU) और इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) की तर्ज पर विकसित इस अत्याधुनिक ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 या 17 जुलाई को हरी झंडी दिखा सकते हैं, हालांकि 17 जुलाई को इसके व्यावसायिक शुभारंभ की अधिक संभावना जताई जा रही है।
नई दिल्ली: भारत परिवहन क्षेत्र में एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन (Hydrogen Multiple Unit - HMU) अब परिचालन के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले दिनों में इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यह ट्रेन हरियाणा के सोनीपत और जींद के बीच अपना पहला वाणिज्यिक संचालन शुरू करेगी।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 या 17 जुलाई को इस हाइड्रोजन ट्रेन को लॉन्च कर सकते हैं। हालांकि, 17 जुलाई को इसके औपचारिक कमर्शियल संचालन की संभावना अधिक बताई जा रही है। यह परियोजना भारतीय रेलवे के हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सोनीपत-जींद रूट पर शुरू होगा पहला संचालन
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को फिलहाल सोनीपत-जींद रेलखंड पर चलाने की योजना बनाई गई है। यह ट्रेन डीजल मल्टीपल यूनिट (DMU) और इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) की तर्ज पर डिजाइन की गई है, लेकिन इसकी ऊर्जा जरूरतें हाइड्रोजन ईंधन सेल से पूरी होंगी। रेलवे के अनुसार, शुरुआत में यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन संचालित की जाएगी। हर दिन इसके दो फेरे निर्धारित किए गए हैं।
सप्ताह में एक दिन ट्रेन को रखरखाव (Maintenance) के लिए रोका जाएगा ताकि इसके तकनीकी सिस्टम की जांच की जा सके और संचालन को सुरक्षित बनाए रखा जा सके।
एक बार हाइड्रोजन भरने पर चलेगी 350 किलोमीटर तक
हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल संचालन है। इसमें हाइड्रोजन ईंधन सेल का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में प्रदूषण काफी कम होगा। सूत्रों के अनुसार, ट्रेन में एक बार हाइड्रोजन ईंधन भरने के बाद यह लगभग 350 से 360 किलोमीटर तक सफर कर सकती है। दिन में केवल दो फेरे लगाने का प्रमुख कारण इसकी ईंधन क्षमता बताई जा रही है।
इस ट्रेन में आठ हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगाए गए हैं, जो बिजली उत्पन्न करते हैं और ट्रेन को संचालित करने में मदद करते हैं। हाइड्रोजन आधारित तकनीक से निकलने वाला उत्सर्जन पारंपरिक ईंधनों की तुलना में बेहद कम होता है, जिससे यह भविष्य के टिकाऊ परिवहन विकल्पों में शामिल हो सकती है।

10 कोच वाली ट्रेन में होगी हजारों यात्रियों की क्षमता
भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें कुल 10 कोच होंगे, जिनमें से आठ कोच यात्रियों के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस ट्रेन की कुल यात्री क्षमता लगभग 2600 यात्रियों की होगी। ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सामान्य पैसेंजर ट्रेन की तरह यात्रियों को सुविधाजनक सफर उपलब्ध करा सके।
तकनीकी रूप से यह ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चलने में सक्षम है, लेकिन शुरुआती व्यावसायिक संचालन के दौरान इसकी अधिकतम गति लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाएगी।
भविष्य में अन्य रूटों पर विस्तार की योजना
फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन केवल सोनीपत-जींद सेक्शन तक सीमित रहेगा। हालांकि, रेलवे भविष्य में इसे दिल्ली, हरियाणा और देश के अन्य संभावित रेल मार्गों पर भी चलाने की योजना बना रहा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि शुरुआती संचालन से प्राप्त अनुभव के आधार पर भविष्य में हाइड्रोजन ट्रेनों के नेटवर्क का विस्तार किया जा सकता है। इससे रेलवे को कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी।
ट्रेन के रखरखाव से जुड़ी एक खास व्यवस्था भी तैयार की गई है। जब इस हाइड्रोजन ट्रेन को मेंटेनेंस के लिए सोनीपत से दिल्ली स्थित शकूरबस्ती लाया जाएगा, तो इसे हाइड्रोजन सिस्टम के बजाय सामान्य इंजन की मदद से ले जाया जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि रखरखाव केंद्र तक ट्रेन को सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सके और हाइड्रोजन सिस्टम का इस्तेमाल केवल निर्धारित परिचालन मार्ग पर ही किया जाए।












