40 वर्ष की उम्र के बाद हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और खराब जीवनशैली हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और वजन नियंत्रित रखकर हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
Measures to prevent heart attacks: बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई जैविक बदलाव होते हैं, जिनका असर हृदय की कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। 40 वर्ष के बाद हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे कारक हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जीवनशैली में सुधार और नियमित स्वास्थ्य जांच से हृदय संबंधी कई गंभीर समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
केवल उम्र नहीं, जीवनशैली भी है महत्वपूर्ण
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार केवल वास्तविक उम्र (Chronological Age) ही नहीं, बल्कि आपकी जीवनशैली भी हृदय स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डालती है।
आजकल कम उम्र के लोगों में भी हृदय रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण धूम्रपान, अत्यधिक शराब सेवन, असंतुलित भोजन, तनाव, मोटापा और लंबे समय तक बैठे रहकर काम करना माना जाता है।
यदि कोई व्यक्ति नियमित व्यायाम करता है, संतुलित भोजन लेता है और धूम्रपान से दूर रहता है, तो बढ़ती उम्र के बावजूद उसका हृदय अपेक्षाकृत स्वस्थ रह सकता है।
40 वर्ष के बाद नियमित हेल्थ चेकअप क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि 40 वर्ष की आयु पार करने के बाद हर व्यक्ति को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, विशेषकर यदि:
परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हो।
- मधुमेह (डायबिटीज) हो।
- हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो।
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ हो।
- धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हों।
इन परिस्थितियों में साल में कम से कम एक बार डॉक्टर की सलाह के अनुसार हार्ट हेल्थ चेकअप कराना लाभदायक हो सकता है।
कौन-कौन सी जांच कराना उपयोगी हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर निम्न जांच की सलाह दे सकते हैं:
- लिपिड प्रोफाइल
- ब्लड शुगर टेस्ट
- HbA1c (मधुमेह नियंत्रण का आकलन)
- रूटीन ब्लड टेस्ट
- ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग
- किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट
- ट्रेडमिल टेस्ट (TMT), यदि आवश्यक हो
- CT कैल्शियम स्कोरिंग, डॉक्टर की सलाह पर
ध्यान रहे कि कौन-सी जांच आवश्यक है, इसका निर्णय केवल चिकित्सक द्वारा व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल पर रखें नियंत्रण

हृदय रोगों के तीन प्रमुख जोखिम कारक हैं:
1. हाई ब्लड प्रेशर
लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। यदि ब्लड प्रेशर सामान्य सीमा से अधिक रहता है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार और नियमित निगरानी आवश्यक है।
2. डायबिटीज
अनियंत्रित रक्त शर्करा रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को नियमित HbA1c जांच करानी चाहिए ताकि पिछले तीन महीनों की औसत शुगर का आकलन किया जा सके।
3. बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल
एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) बढ़ने से धमनियों में वसा जमा हो सकती है, जिससे हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
पेट की अतिरिक्त चर्बी क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट के अंदर जमा विसरल फैट (Visceral Fat) केवल मोटापे का संकेत नहीं, बल्कि हृदय रोगों का भी एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।
अत्यधिक पेट की चर्बी शरीर में सूजन, फैटी लिवर और मेटाबॉलिक समस्याओं का कारण बन सकती है।
आमतौर पर स्वस्थ कमर का माप:
- पुरुष: 90 सेंटीमीटर से कम
- महिलाएं: 80 सेंटीमीटर से कम
यदि कमर का घेरा इससे अधिक है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर वजन नियंत्रित करने की योजना बनानी चाहिए।
रोजाना शारीरिक गतिविधि रखें
विश्व स्वास्थ्य संगठनों और हृदय स्वास्थ्य संबंधी अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए।
इसके लिए:
- तेज चाल से पैदल चलना
- साइकिल चलाना
- योग
- हल्का व्यायाम
- तैराकी
जैसी गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं।
लगातार बैठकर काम करने से बचें
यदि आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है, तो हर घंटे कुछ मिनट का ब्रेक लेना फायदेमंद हो सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
- हर घंटे 5 मिनट टहलें।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- शरीर को स्ट्रेच करें।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
ऐसी छोटी आदतें लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती हैं।
हार्ट हेल्दी जीवनशैली अपनाने के 7 आसान उपाय
- संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
- नियमित व्यायाम या तेज चाल से पैदल चलें।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
- शराब का सेवन सीमित करें या न करें।
- ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव नियंत्रित रखें।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराएं।













