भारत के सेवा क्षेत्र की वृद्धि सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
बिजनेस न्यूज़: भारत के सेवा क्षेत्र ने सितंबर 2026 में मजबूत प्रदर्शन किया है। घरेलू मांग और नए ऑर्डर में बढ़ोतरी के कारण सेवा गतिविधियों की वृद्धि तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। रोजगार और निर्यात कारोबार में भी सुधार दर्ज किया गया, जबकि कंपनियों पर लागत का दबाव कम हुआ। हालांकि, पूरे दूसरी वित्तीय तिमाही की औसत वृद्धि अब भी अपेक्षाकृत कमजोर रही।
सितंबर में Services PMI बढ़कर 55.2 हुआ
मासिक सर्वे के मुताबिक, HSBC India Services PMI Business Activity Index अगस्त के 54.1 से बढ़कर सितंबर में 55.2 पर पहुंच गया। यह जून 2026 के बाद सेवा क्षेत्र में गतिविधियों की सबसे तेज वृद्धि को दर्शाता है। Purchasing Managers’ Index यानी PMI में 50 से ऊपर का आंकड़ा कारोबार में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर संकुचन का संकेत देता है। इस लिहाज से 55.2 का स्तर भारतीय सेवा क्षेत्र में लगातार विस्तार की स्थिति को दर्शाता है।
हालांकि, सितंबर की मजबूती के बावजूद दूसरी वित्तीय तिमाही में सेवा क्षेत्र की औसत वृद्धि मार्च 2022 के बाद सबसे कमजोर रही। इसका अर्थ है कि हालिया सुधार सकारात्मक है, लेकिन तिमाही स्तर पर पूरी तरह मजबूत रिकवरी अभी दिखाई नहीं देती। यह सर्वे लगभग 400 सेवा क्षेत्र की कंपनियों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
घरेलू मांग बनी विकास की सबसे बड़ी ताकत
सितंबर में सेवा क्षेत्र के विस्तार के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका घरेलू मांग की रही। नए ऑर्डर में तेजी ने कंपनियों की कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
रिपोर्ट में डिजिटल सेवाओं, खाद्य कारोबार, बीमा, ऋण, सॉफ्टवेयर, परिवहन और पर्यटन जैसी गतिविधियों में मांग बढ़ने का उल्लेख किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय उपभोक्ता और कारोबारी गतिविधियां सेवा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं।
एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, सेवा क्षेत्र में सुधार जारी रहा और इसे मजबूत घरेलू मांग से समर्थन मिला। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में लगातार वृद्धि हुई, हालांकि निर्यात की रफ्तार घरेलू मांग की तुलना में कुछ धीमी रही।
जर्मनी, UAE और अमेरिका से बढ़ी मांग
भारतीय सेवा कंपनियों को विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर में भी सुधार दर्ज किया गया। सर्वे में शामिल कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन और अमेरिका जैसे बाजारों से बेहतर मांग मिलने की जानकारी दी। वैश्विक स्तर पर भारतीय आईटी, सॉफ्टवेयर, बिजनेस सर्विसेज और अन्य सेवा क्षेत्रों की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय मांग में यह सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
हालांकि, निर्यात कारोबार की वृद्धि दर में कुछ नरमी रही। इसके बावजूद लगातार बढ़ते विदेशी ऑर्डर ने कंपनियों के कारोबारी भरोसे को मजबूत बनाए रखने में मदद की।

रोजगार में बढ़ोतरी, लेकिन अगस्त से धीमी रही रफ्तार
नए ऑर्डर और भविष्य की परियोजनाओं की पाइपलाइन मजबूत होने के कारण सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने सितंबर में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती जारी रखी। इससे रोजगार में बढ़ोतरी हुई। हालांकि, नई नियुक्तियों की गति अगस्त की तुलना में कम रही। इसके बावजूद सेवा क्षेत्र में रोजगार का लगातार बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। रिपोर्ट के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन और सेवा कंपनियों में लगातार भर्ती ने निजी क्षेत्र के कुल रोजगार को सहारा दिया।
इनपुट लागत का दबाव हुआ कम
सितंबर में सेवा कंपनियों के लिए एक और राहत की बात लागत से जुड़ी रही। दूसरी वित्तीय तिमाही के अंत में इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार कम हुई।सर्वे के अनुसार, इनपुट मूल्य मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गई। प्रांजुल भंडारी ने बताया कि सेवा प्रदाताओं पर इनपुट लागत का दबाव करीब 10 महीने के निचले स्तर पर आ गया है।
लागत दबाव कम होने से कंपनियों पर ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ाने की मजबूरी भी कम हुई। इससे आने वाले महीनों में सेवा कारोबार के लिए मांग को बनाए रखना आसान हो सकता है।
Composite PMI भी जून के बाद सबसे मजबूत
भारत का HSBC India Composite PMI Output Index भी सितंबर में 54.3 से बढ़कर 55.9 हो गया। यह जून के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे तेज वृद्धि को दर्शाता है। Composite PMI में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को शामिल किया जाता है। सितंबर के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि दोनों क्षेत्रों में रोजगार और कारोबारी गतिविधियों ने अर्थव्यवस्था के निजी क्षेत्र के प्रदर्शन को समर्थन दिया।











