सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर 90.6475 पर आ गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और व्यापार वार्ता में गतिरोध से करेंसी पर दबाव बढ़ा। रुपया एशिया में सबसे कमजोर प्रदर्शन कर रहा है।
Business: सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में गतिरोध और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण करेंसी पर दबाव बना। रुपया 0.2 प्रतिशत गिरकर 90.6475 पर आ गया, जिसने 12 दिसंबर के 90.55 के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर दिया।
रुपया का कमजोर प्रदर्शन
भारतीय रुपया एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले करेंसी में 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण भारत के सामानों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ हैं, जो देश के सबसे बड़े मार्केट में एक्सपोर्ट को प्रभावित कर रहे हैं। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी और बॉन्ड का आकर्षण कम हुआ है।
चार ट्रेडर्स ने रॉयटर्स को बताया कि भारतीय सेंट्रल बैंक के संभावित दखल की उम्मीद ने रुपए को बड़े नुकसान से बचाया, लेकिन सेंटीमेंट कमजोर बना हुआ है। डॉलर के कमजोर होने के बावजूद रुपया इसका फायदा नहीं उठा पा रहा है। डॉलर इंडेक्स इस महीने अब तक 1.1 प्रतिशत नीचे है, जो अन्य करेंसी को सपोर्ट दे रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
विदेशी निवेशकों ने 2025 में अब तक 18 बिलियन डॉलर से अधिक के भारतीय स्टॉक्स बेचे हैं। इससे भारत पोर्टफोलियो आउटफ्लो के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित बाजारों में से एक बन गया है। दिसंबर में विदेशी निवेशकों ने 500 मिलियन डॉलर से अधिक के बॉन्ड भी बेचे हैं। यह लगातार बिकवाली रुपया कमजोर होने का मुख्य कारण बनी है।
ट्रेड वार्ता और नकारात्मक सेंटीमेंट
मुंबई के एक बैंक के ट्रेडर ने बताया कि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार की टिप्पणी कि ट्रेड डील मार्च तक ही होने की संभावना है, ने निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर किया। इसके अलावा, ब्लूमबर्ग न्यूज ने रिपोर्ट किया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस साल के अंत तक ट्रेड डील को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना नहीं है।
ट्रेड वार्ता में धीमी प्रगति और नकारात्मक संकेतों के कारण रुपया डॉलर के मजबूत रुझान का लाभ नहीं उठा पा रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बाजार में अनिश्चितता ने भारत की करेंसी को दबाव में रखा है।
अर्थशास्त्रियों के अनुमान
नवंबर के लिए भारत का ट्रेड डेटा बाद में जारी होने वाला है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अक्टूबर में रिकॉर्ड 41 बिलियन डॉलर के उच्च स्तर के मुकाबले नवंबर में 32 बिलियन डॉलर का घाटा हो सकता है। यह आंकड़ा भारत की एक्सपोर्ट और इंपोर्ट स्थिति के बारे में संकेत देगा और आगे के करेंसी रुझान को प्रभावित करेगा।
फॉरेक्स एडवाइजरी का दृष्टिकोण
फॉरेक्स एडवाइजरी फर्म IFA ग्लोबल का कहना है कि मध्यम अवधि में डॉलर की कमजोरी के बावजूद रुपया कमजोर प्रदर्शन जारी रख सकता है। उनके अनुसार, अगले छह हफ्तों में रुपया 89.60 से 90.60 की रेंज में रह सकता है। इसका मतलब है कि निवेशकों और व्यवसायों को करेंसी के उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।











