IPL अनकैप्ड ड्राफ्ट रिपोर्ट: करोड़ों बिकने वाले खिलाड़ियों की पढ़ाई का ब्यौरा

IPL अनकैप्ड ड्राफ्ट रिपोर्ट: करोड़ों बिकने वाले खिलाड़ियों की पढ़ाई का ब्यौरा

आईपीएल नीलामी में करोड़ों में बिके अनकैप्ड खिलाड़ियों की पहचान सिर्फ उनके खेल से नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई और संघर्ष से भी जुड़ी है। प्रशांत वीर, कार्तिक शर्मा, आकिब नबी डार और मंगेश यादव जैसे खिलाड़ियों ने शिक्षा और मेहनत के सहारे सीमित संसाधनों से निकलकर आईपीएल तक का सफर तय किया।

IPL Uncapped Players Education Report: हालिया आईपीएल नीलामी में चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ जैसी फ्रेंचाइजियों ने उन अनकैप्ड खिलाड़ियों पर बड़ी रकम खर्च की, जिनकी कहानियां मैदान के बाहर भी प्रेरणादायक हैं। ये खिलाड़ी देश के अलग-अलग हिस्सों से आए, किसी ने स्कूल तक पढ़ाई की तो किसी ने पढ़ाई और क्रिकेट के बीच कठिन संतुलन बनाया। आईपीएल मंच तक पहुंचने का उनका सफर यह बताता है कि सही मार्गदर्शन, अनुशासन और मेहनत के साथ सीमित साधनों में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

करोड़ों की बोली और पढ़ाई का बैकग्राउंड

इस नीलामी में सबसे ज्यादा ध्यान खींचा प्रशांत वीर ने, जिन्हें चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.2 करोड़ रुपये में खरीदा। प्रशांत की शुरुआती पढ़ाई ब्लॉक संग्रामपुर की भारद्वाज एकेडमी और केपीएस स्कूल से हुई। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका झुकाव साफ था, लेकिन पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखना उनके सफर का अहम हिस्सा रहा। शहर के डॉ. भीमराव आंबेडकर स्टेडियम में कोच गालिब अंसारी की देखरेख में उनकी प्रतिभा निखरी, जिसका नतीजा आज आईपीएल के बड़े मंच पर नजर आ रहा है।

इतनी ही रकम में चेन्नई सुपर किंग्स ने राजस्थान के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज कार्तिक शर्मा को भी टीम में शामिल किया। 2006 में जन्मे कार्तिक ने 12वीं तक पढ़ाई पूरी की है। कम उम्र में आईपीएल तक पहुंचना बताता है कि उन्होंने पढ़ाई के बाद अपने करियर को लेकर साफ फैसला लिया और पूरी तरह क्रिकेट पर फोकस किया।

सीमित संसाधन, बड़ा सपना

दिल्ली कैपिटल्स द्वारा 8.4 करोड़ रुपये में खरीदे गए आकिब नबी डार का सफर जम्मू-कश्मीर जैसे सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र से शुरू हुआ। तेज गेंदबाज आकिब ने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। उनकी पढ़ाई को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उनका सफर यह दिखाता है कि कठिन हालात भी मजबूत इरादों के आगे रुकावट नहीं बनते।

तेजस्वी सिंह दहिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। पिछले साल अनसोल्ड रहने के बाद इस बार कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें 3 करोड़ रुपये में खरीदा। उनकी बेस प्राइस सिर्फ 30 लाख थी। तेजस्वी की वापसी के पीछे द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित कोच संजय भारद्वाज का बड़ा योगदान रहा। अनुशासन और त्याग से भरे गुरुकुल जीवन ने उनके खेल और सोच दोनों को मजबूत किया।

पढ़ाई और क्रिकेट का कठिन संतुलन

लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुकुल चौधरी को 2.60 करोड़ रुपये में खरीदा। सीकर के इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने 10वीं और 12वीं 70 से 75 प्रतिशत अंकों के साथ पास की, लेकिन क्रिकेट के जुनून के चलते ग्रेजुएशन पूरा नहीं कर सके। परिवार की उम्मीदें सरकारी नौकरी से जुड़ी थीं, मगर पिता ने बेटे को क्रिकेट का सपना पूरा करने का मौका दिया।

नमन तिवारी और मंगेश यादव की कहानी भी इसी संघर्ष को दर्शाती है। मंगेश यादव, जिन्हें रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 5.20 करोड़ रुपये में खरीदा, एक साधारण परिवार से आते हैं। छिंदवाड़ा के बोरगांव में पले-बढ़े मंगेश ने 12वीं तक पढ़ाई के बाद क्रिकेट को करियर बनाया और अपनी मेहनत से आईपीएल तक पहुंचे।

Leave a comment