ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई शनिवार को कोम में अपने पिता अली खामेनेई की शोकसभा की अगुवाई कर पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आ सकते हैं। इस बीच अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
तेहरान: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई शनिवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आ सकते हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वे कोम शहर स्थित हजरत मासूमेह दरगाह में आयोजित अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की शोकसभा की अगुवाई करेंगे। यदि यह कार्यक्रम तय योजना के अनुसार होता है, तो यह उनके सर्वोच्च नेतृत्व संभालने के बाद पहला सार्वजनिक संबोधन और उपस्थिति होगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे क्षेत्र की रणनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है।
पहली सार्वजनिक उपस्थिति पर टिकी दुनिया की नजर
मुजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक जीवन से दूर रहे हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से वे किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं।
ईरानी समाचार एजेंसियों के अनुसार, कोम में होने वाली शोकसभा उनके नेतृत्व की औपचारिक सार्वजनिक शुरुआत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के जरिए ईरानी नेतृत्व देश और दुनिया को स्थिरता का संदेश देना चाहता है।
अली खामेनेई के निधन के बाद बदला नेतृत्व
पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को शुक्रवार को मशहद स्थित इमाम रजा के पवित्र रौजे में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके निधन के बाद धार्मिक परिषद ने मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना।
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद देश की सर्वोच्च संवैधानिक और धार्मिक संस्था माना जाता है। विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, सशस्त्र बलों और कई प्रमुख संस्थाओं पर अंतिम निर्णय का अधिकार इसी पद के पास होता है। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर का सार्वजनिक रूप से सामने आना घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक कार्यक्रमों से रहे दूर
कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वर्ष की शुरुआत में हुए एक हमले में मुजतबा खामेनेई घायल हुए थे। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। इसके बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वे शनिवार को सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं तो इससे यह संकेत मिलेगा कि ईरानी नेतृत्व सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आश्वस्त है और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना चाहता है।

अमेरिका-ईरान तनाव बना हुआ है बरकरार
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिका ने बुशहर परमाणु संयंत्र के आसपास हवाई हमला किया, हालांकि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दूसरी ओर, अमेरिका ने इन घटनाओं को लेकर संयमित प्रतिक्रिया दी है और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता दोहराई है। दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत जारी रहने की भी खबरें सामने आई हैं।
क्षेत्रीय संघर्ष ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
ईरान ने हाल के दिनों में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया, जबकि संबंधित देशों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट करने की बात कही।
इसी दौरान ईरान ने उत्तरी क्षेत्र में चीन और रूस से जुड़े रणनीतिक रेलवे पुल पर अमेरिकी हमले का भी आरोप लगाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा दबाव
वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इस तनाव से प्रभावित हो रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही धीमी पड़ने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबा खिंचता है तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
नेतन्याहू का बयान भी बना चर्चा का विषय
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने दोहराया कि इजराइल किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। नेतन्याहू के इस बयान को पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इजराइली नेतृत्व का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए देश तैयार है।
विशेषज्ञों की नजर नए नेतृत्व पर
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय रणनीति पर दुनिया की नजर रहेगी। यदि शनिवार की शोकसभा में वे कोई महत्वपूर्ण संदेश देते हैं तो उसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका, इजराइल, खाड़ी देशों और वैश्विक कूटनीति पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें कोम में होने वाले इस कार्यक्रम पर टिकी हैं, जहां नए सुप्रीम लीडर की पहली सार्वजनिक उपस्थिति ईरान के भविष्य की दिशा का संकेत मानी जा रही है।












