भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह तेजी के बाद गिरावट देखी। आईटी शेयरों में बिकवाली से निफ्टी और सेंसेक्स प्रभावित हुए। विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक और मुनाफावसूली से निवेशकों का रुख दबाव में रहा।
Market This Week: भारतीय शेयर बाजार ने इस सप्ताह तेजी के साथ शुरुआत की थी, लेकिन फिर गिरावट में बंद हुआ। अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम ट्रेड डील की खुशी ज्यादा देर तक बाजार में नहीं टिक सकी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी रिपोर्ट्स ने आईटी सेक्टर में दबाव बढ़ा दिया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी 50 इस साप्ताहिक आधार पर करीब 1 प्रतिशत टूट गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में बिकवाली रही। AI तकनीक के कारण भारतीय आईटी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स ऑटोमेट होने और समय से पहले पूरे होने की संभावना ने निवेशकों में चिंता पैदा की है। इससे आईटी कंपनियों की कमाई और प्रोडक्टिविटी पर असर पड़ने की आशंका बढ़ी।
आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
इस सप्ताह आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स इस हफ्ते 8.2 प्रतिशत गिर गया, जो पिछले 10 महीनों में इसका सबसे खराब प्रदर्शन है। आईटी सेक्टर भारतीय शेयर बाजार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है और इसका असर निफ्टी और सेंसेक्स पर काफी महसूस होता है। Infosys, TCS, HCL Tech, Tech Mahindra और Wipro जैसे प्रमुख शेयर दबाव में रहे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस गिरावट का बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण काम ऑटोमेट होने की संभावनाएं हैं। इससे प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो सकते हैं और कंपनियों की आय पर असर पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता बढ़ रही है कि भारतीय आईटी कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल और कमाई को बनाए रख पाएंगी या नहीं।
निफ्टी आईटी इंडेक्स 2026 में लगातार कमजोर
2026 में अब तक निफ्टी आईटी इंडेक्स लगभग 13.7 प्रतिशत गिर चुका है। यह साल 2025 में आई 12.6 प्रतिशत गिरावट से भी ज्यादा है। फरवरी में आईटी सेक्टर की 10 प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 50 अरब डॉलर घट गया। इसके चलते निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव साफ देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल आईटी सेक्टर की कमजोरी के कारण बाजार की दिशा प्रभावित रही। निवेशकों ने तेजी के बाद मुनाफावसूली की और इसने गिरावट को और तेज कर दिया।
मुनाफावसूली और ट्रेड डील का प्रभाव
फरवरी के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। इसका मुख्य कारण लंबे समय से प्रतीक्षित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता था। 6 फरवरी को समाप्त हुए हफ्ते में सेंसेक्स और निफ्टी 1.5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़े थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस तेजी के बाद मुनाफावसूली करना स्वाभाविक था। कुछ निवेशकों ने अपने लाभ को सुरक्षित करने के लिए शेयर बेचे, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा। हालांकि, यह गिरावट पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। तकनीकी संकेत बताते हैं कि निफ्टी अभी भी महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर बना हुआ है और आने वाले हफ्तों में स्थिर होने की संभावना है।
सेक्टरल परफॉर्मेंस का विश्लेषण
इस सप्ताह आईटी सेक्टर के अलावा मेटल सेक्टर में भी कमजोरी देखी गई। मेटल इंडेक्स में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई। मीडिया और FMCG सेक्टर में क्रमशः 1 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत की कमजोरी रही। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित बदलाव ने निवेशकों का रुख कमजोर किया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि IT सेक्टर की कमजोरी मुख्य रूप से घरेलू निवेशकों और विदेशी निवेशकों के व्यवहार से जुड़ी है। विदेशी निवेशकों ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण बिकवाली की, जबकि घरेलू निवेशकों ने मुनाफावसूली की।
आने वाले हफ्तों के लिए बाजार का अनुमान
विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी 25,000 के स्तर को फिलहाल अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर बना रहता है, तो बाजार में स्थिरता आ सकती है। सेंसेक्स के लिए 82,000 से 82,400 का जोन अहम सपोर्ट है। ऊपर की ओर 25,800 से 26,000 और 84,000 से 84,500 के स्तर को मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस हफ्ते आईटी सेक्टर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखें। यदि AI के प्रभाव और अमेरिका में ब्याज दरों के बदलाव पर स्थिति साफ होती है, तो बाजार में दोबारा तेजी लौट सकती है।










