झारखंड के जमशेदपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। शहर के कदमा और बिष्टुपुर क्षेत्र में आयुष चिकित्सा से जुड़ी दो सुविधाओं में सोमवार, 12 अक्टूबर से मरीजों का इलाज शुरू करने की तैयारी है। इनमें कदमा के शास्त्रीनगर में बना 50 बेड वाला धन्वंतरि आयुष अस्पताल और सर्किट हाउस एरिया स्थित पंचकर्म केंद्र शामिल हैं। इन केंद्रों के शुरू होने से शहर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आयुष चिकित्सा पद्धतियों से उपचार कराने का एक और विकल्प मिलेगा। शुरुआती व्यवस्था के तहत दोनों स्थानों पर होम्योपैथी की ओपीडी शुरू की जाएगी और मरीजों को उपलब्धता के अनुसार मुफ्त दवाएं दी जाएंगी।
कदमा के शास्त्रीनगर में तैयार धन्वंतरि आयुष अस्पताल इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 50 बेड की क्षमता वाले इस अस्पताल का निर्माण स्थानीय स्तर पर आयुष चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है। अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी के माध्यम से भी इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल की परिकल्पना आयुष की अलग-अलग पद्धतियों को एक ही परिसर में उपलब्ध कराने की है, ताकि मरीज अपनी जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार का विकल्प चुन सकें। निर्माण कार्य पर पहले की रिपोर्टों में लगभग 17 से 18 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई थी।
फिलहाल अस्पताल में शुरुआत के लिए होम्योपैथी के डॉक्टरों और कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां तीन होम्योपैथी चिकित्सक और एक कर्मचारी की व्यवस्था की गई है। शुरुआती चरण में सामान्य बीमारियों से परेशान मरीज ओपीडी में पहुंचकर चिकित्सकीय परामर्श ले सकेंगे। जरूरत के अनुसार उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल के पूरी तरह व्यवस्थित होने और विभिन्न विभागों के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकों तथा कर्मचारियों की उपलब्धता भी अहम होगी। इसलिए शुरुआत में मिलने वाली सुविधा और भविष्य में विकसित होने वाली सभी सेवाओं के बीच अंतर समझना जरूरी है।
कदमा में अस्पताल शुरू होने से स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उन्हें इलाज के लिए शहर के दूसरे हिस्सों में जाने की जरूरत कम पड़ सकती है। खासकर ऐसे मरीज, जो सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए नियमित रूप से चिकित्सकीय सलाह लेते हैं, उनके लिए नजदीक में ओपीडी की सुविधा उपयोगी हो सकती है। हालांकि, अस्पताल में किस तरह की जांच और उपचार उपलब्ध होंगे, यह संबंधित विभाग की वास्तविक व्यवस्था और चिकित्सकों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले संबंधित केंद्र से समय और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी ले लेना उचित होगा।
दूसरी ओर, सर्किट हाउस एरिया स्थित पंचकर्म केंद्र में भी सोमवार से ओपीडी शुरू करने की व्यवस्था की गई है। जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मुकुल कुमार दीक्षित के अनुसार, केंद्र में सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक ओपीडी चलाने की योजना है। शुरुआती व्यवस्था के तहत यहां दो डॉक्टरों और एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्त किया गया है। होम्योपैथी की चिकित्सक डॉ. रेखा दास और डॉ. रौनक अफरोज खानम बारी-बारी से तीन-तीन दिन सेवाएं देंगी। फिलहाल यहां सामान्य बीमारियों के मरीजों को होम्योपैथी पद्धति से परामर्श और उपलब्ध दवाएं मुफ्त देने की व्यवस्था की गई है।
पंचकर्म केंद्र का नाम होने के कारण मरीजों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि केंद्र में पंचकर्म की सभी प्रक्रियाएं पहले दिन से ही उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। पंचकर्म आयुर्वेद की विशिष्ट उपचार पद्धतियों का समूह है, जिसके लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ, उपयुक्त स्थान, उपकरण और मरीज की चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र में पंचकर्म से संबंधित विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे पूरी की जानी है। इसलिए शुरुआती दिनों में मरीजों को वहां उपलब्ध ओपीडी सेवाओं के अनुसार ही उपचार मिलेगा। पंचकर्म की किसी विशेष प्रक्रिया के लिए जाने वाले लोगों को पहले केंद्र से इसकी उपलब्धता की पुष्टि करनी चाहिए।
आयुष चिकित्सा में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी विभिन्न पद्धतियां शामिल हैं। इनका उद्देश्य अलग-अलग चिकित्सकीय दृष्टिकोणों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करना है। जमशेदपुर में नए अस्पताल और केंद्र शुरू होने से स्थानीय स्तर पर आयुष चिकित्सा का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। कदमा का धन्वंतरि आयुष अस्पताल विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे 50 बेड की क्षमता के साथ विकसित किया गया है और इसमें भविष्य में कई पद्धतियों के लिए अलग-अलग सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।
इन सुविधाओं का लाभ केवल जमशेदपुर शहर तक सीमित रहने के बजाय आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। कोल्हान क्षेत्र के लोगों को आयुष चिकित्सा की कुछ विशेष सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों या राज्यों में जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था विकसित होने से यात्रा, समय और खर्च से जुड़ी परेशानियों में कमी आ सकती है। हालांकि, यह लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल और पंचकर्म केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों, कर्मचारियों, दवाओं और उपचार सुविधाओं की व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से विकसित होती है।
कदमा स्थित अस्पताल का निर्माण पूरा होने के बाद इसके संचालन की तैयारी पहले से चल रही थी। इससे पहले आई रिपोर्टों में भवन को विभाग को सौंपने, आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति और अस्पताल के संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया था। अस्पताल में ओपीडी के साथ मरीजों को भर्ती करने की सुविधा देने की योजना भी बताई गई थी। अब शुरुआती स्तर पर होम्योपैथी ओपीडी शुरू किए जाने से परियोजना के संचालन की दिशा में कदम आगे बढ़ेगा। फिर भी सभी आयुष पद्धतियों की सेवाएं कब और किस स्तर पर शुरू होंगी, इसके लिए विभाग की ओर से आगे की व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।
नए केंद्रों की शुरुआत के साथ मरीजों के लिए मुफ्त दवा की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के दौरान दवाओं पर होने वाला खर्च कई परिवारों के बजट को प्रभावित करता है। सरकारी केंद्रों पर मुफ्त दवा मिलने से पात्र मरीजों को आर्थिक राहत मिल सकती है। हालांकि, मुफ्त दवा की उपलब्धता केंद्र में मौजूद स्टॉक और संबंधित उपचार व्यवस्था पर निर्भर करेगी। मरीजों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवाएं लेनी चाहिए और किसी भी दवा को अपने मन से शुरू करने या बंद करने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में केवल अस्पताल भवन तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। नियमित रूप से डॉक्टरों की उपलब्धता, कर्मचारियों की नियुक्ति, जरूरी उपकरण, दवाओं का स्टॉक, साफ-सफाई और मरीजों के लिए व्यवस्थित पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं भी उतनी ही जरूरी हैं। कदमा और सर्किट हाउस एरिया के केंद्रों में शुरुआती ओपीडी शुरू होने के बाद इन व्यवस्थाओं का सुचारु संचालन मरीजों के अनुभव को प्रभावित करेगा। यदि सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहती हैं और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों की नियुक्ति होती है, तो स्थानीय लोगों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सकता है।
पंचकर्म जैसी विशिष्ट आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं के लिए भी विशेषज्ञता और मरीज की स्थिति का आकलन आवश्यक है। हर प्रक्रिया हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती, इसलिए प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह के बिना कोई उपचार नहीं कराना चाहिए। इसी तरह होम्योपैथी या आयुष की किसी अन्य पद्धति से इलाज करा रहे मरीजों को गंभीर या आपातकालीन लक्षणों की स्थिति में उचित आधुनिक चिकित्सा सुविधा लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। नए केंद्रों का उद्देश्य उपचार के विकल्प उपलब्ध कराना है, इसलिए मरीजों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन लेना चाहिए।
जमशेदपुर में इन दो सुविधाओं की शुरुआत से शहर की आयुष स्वास्थ्य व्यवस्था को आगे बढ़ाने की उम्मीद है। कदमा का 50 बेड वाला धन्वंतरि आयुष अस्पताल भविष्य में बहु-पद्धति उपचार और भर्ती सुविधा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि सर्किट हाउस एरिया का पंचकर्म केंद्र आयुष से जुड़ी विशेष सेवाओं के विकास के लिए तैयार किया गया है। शुरुआती तौर पर दोनों स्थानों पर होम्योपैथी ओपीडी और मुफ्त दवा की व्यवस्था शुरू की जा रही है। आगे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, अन्य विभागों का संचालन और मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं कितनी जल्दी और व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध कराई जाती हैं।
सोमवार, 12 अक्टूबर से शुरू होने वाली ओपीडी के बाद अब स्थानीय मरीज इन केंद्रों की सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। मरीजों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित केंद्र के समय, उपलब्ध डॉक्टरों और दवाओं की जानकारी लेकर जाएं। फिलहाल, यह पहल जमशेदपुर में आयुष चिकित्सा के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है, जबकि केंद्रों की पूरी क्षमता का लाभ मिलने के लिए बाकी व्यवस्थाओं का विकसित होना भी जरूरी रहेगा।












