झारखंड के दो प्रशासनिक अधिकारी विभागीय जांच में आरोपमुक्त, सरकार ने खत्म की कार्रवाई

झारखंड सरकार ने विभागीय जांच में आरोप निराधार पाए जाने पर प्रशासनिक अधिकारी अमृता प्रियंका एक्का और रामजी वर्मा को आरोपमुक्त कर कार्रवाई समाप्त कर दी।

झारखंड सरकार ने विभागीय जांच में आरोप निराधार पाए जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अमृता प्रियंका एक्का और रामजी वर्मा को आरोपमुक्त कर दिया है। दोनों के खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई भी समाप्त कर दी गई है।

रांची: झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग ने विभागीय जांच पूरी होने के बाद झारखंड प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों को आरोपों से मुक्त कर दिया है। जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर सरकार ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त करने का फैसला लिया है।

दो अधिकारियों को मिली विभागीय जांच में राहत

झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग ने अधिसूचना जारी कर झारखंड प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अमृता प्रियंका एक्का और अधिकारी रामजी वर्मा को विभागीय आरोपों से मुक्त कर दिया है। जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने के बाद सरकार ने दोनों के खिलाफ चल रही कार्रवाई समाप्त कर दी।

यह फैसला विभागीय जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जिसमें आरोपों को निराधार बताया गया था।

अमृता प्रियंका एक्का पर क्या थे आरोप

गुमला जिले के कामडारा प्रखंड में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के रूप में कार्यरत रहने के दौरान अमृता प्रियंका एक्का पर योजनाओं के क्रियान्वयन में विभागीय निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया था।

उन पर लाभुक समितियों के बजाय सीधे वेंडरों को काम देने, अग्रिम राशि के भुगतान में अनियमितता बरतने तथा समायोजन किए बिना भुगतान करने के आरोप लगे थे। हालांकि विभागीय जांच अधिकारी अरुण वाल्टर सांगा ने जांच के दौरान इन आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया और कार्रवाई समाप्त करने की अनुशंसा की।

रामजी वर्मा के मामले में भी विभाग संतुष्ट

गोविंदपुर के तत्कालीन अंचल अधिकारी रामजी वर्मा के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने एक न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए।

जांच के दौरान रामजी वर्मा ने बताया कि उनके पदभार संभालने से पहले कार्यालय भवन बदलने के दौरान संबंधित संचिका गायब हो गई थी, जिसके कारण दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सके। विभाग ने उनके स्पष्टीकरण को संतोषजनक मानते हुए उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई भी समाप्त कर दी।

हाल ही में दो अन्य अधिकारियों को भी मिली थी राहत

इससे पहले भी झारखंड सरकार ने दो अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को राहत दी थी। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के पूर्व निजी सचिव संजीव कुमार लाल को निलंबन से मुक्त कर बहाल किया गया था, जबकि जीतेंद्र कुमार मुंडा के खिलाफ लगाए गए सभी विभागीय दंड समाप्त कर दिए गए थे।

लगातार कुछ दिनों के भीतर कई अधिकारियों को विभागीय जांच में राहत मिलने के बाद राज्य की प्रशासनिक कार्यवाही और जांच प्रक्रियाओं को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी मामलों में निर्णय विभागीय जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही लिया गया है।

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