झारखंड में रांची स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय पर पुलिस ने छापा मारा है। यह कार्रवाई ED के दो अधिकारियों पर एक पेयजल कर्मी के साथ कथित मारपीट के आरोपों के बाद की गई है। इसी मामले की जांच के सिलसिले में रांची पुलिस ED दफ्तर पहुंची।
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्यालय पर पुलिस द्वारा छापा मारे जाने के बाद राज्य की सियासत में फिर से हंगामा खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई में ED के दो अधिकारियों पर पेयजल कर्मी से कथित मारपीट का आरोप सामने आया है। वहीं, बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है और चेतावनी दी है कि झारखंड को पश्चिम बंगाल जैसा भ्रष्टाचार और अनियमितता वाला राज्य नहीं बनने देंगे।
ED कार्यालय पर छापा
रांची पुलिस ने ED कार्यालय में तलाशी कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि पुलिस ने दो अधिकारियों पर पेयजल कर्मी के साथ मारपीट के आरोप में कार्रवाई की। इस घटना के बाद अधिकारियों और कर्मचारी भारी सतर्कता के साथ कार्य कर रहे हैं। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि ED कार्यालय में मुख्यमंत्री और राज्य पुलिस प्रशासन से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। उनका दावा है कि पुलिस की यह कार्रवाई साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने का प्रयास हो सकता है।
मरांडी ने कहा, हेमंत जी, कान खोलकर सुन लीजिए… झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। आपको भ्रष्टाचार की सजा जरूर मिलेगी।” उन्होंने अपने एक्स सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस मामले को लेकर सरकार पर तंज कसा और चेतावनी दी।

सियासत में अब क्या होगा?
बाबूलाल मरांडी के आरोपों के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में पहले भी ED के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए हैं और झामुमो-कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा एजेंसी पर हमलों की कोशिशें की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं जांच एजेंसियों के स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्य में बाधा डालने का प्रयास हैं। उनके अनुसार, ED को राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच पूरी निष्पक्षता से करने दिया जाना चाहिए।
राज्य में इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर जांच एजेंसियों में हस्तक्षेप और राजनीतिक दखल का आरोप लगाया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन संभावना है कि वे पुलिस कार्रवाई और बाबूलाल मरांडी के आरोपों पर स्पष्टीकरण जारी करेंगे।










