झुंझुनू में माकपा का विरोध प्रदर्शन: सांसद अमराराम ने ED-CBI पर लगाए गंभीर आरोप

झुंझुनूं मे माकपा ने ED-सीबीआई कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने और विपक्ष को निशाना बनाने के आरोप लगाए।

झुंझुनूं में माकपा ने ED और CBI की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप लगाए। कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर नारेबाजी और विरोध जताया। 

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनू जिले में शुक्रवार को राजनीतिक माहौल गरमा गया जब मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर किया गया, जिसमें सीकर से सांसद अमराराम सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे लहराए, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया।

यह विरोध प्रदर्शन केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सामने आया, जिसे माकपा ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

कलेक्ट्रेट के बाहर जुटे कार्यकर्ता, गूंजे नारे

झुंझुनू कलेक्ट्रेट के बाहर बड़ी संख्या में माकपा कार्यकर्ता एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने “ED-CBI की गुंडागर्दी नहीं चलेगी”, “मोदी सरकार होश में आओ” और “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए।

प्रदर्शन के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री का पुतला जलाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।

सांसद अमराराम का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

प्रदर्शन में शामिल सीकर सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण कार्य किए और राज्य को सामाजिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाया।

उन्होंने दावा किया कि केरल ने अति-गरीबी को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है।

अमराराम ने आरोप लगाया कि हाल ही में राजनीतिक घटनाक्रम के बाद जब केरल के नए नेतृत्व ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की, उसके तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ ED की कार्रवाई शुरू हो गई, जो सवाल खड़े करती है।

“ED और CBI से डरने वाली नहीं माकपा”

सांसद अमराराम ने साफ शब्दों में कहा कि माकपा किसी भी जांच एजेंसी से डरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है और इसके नेताओं ने लंबे समय तक जेलों में रहकर भी अपनी विचारधारा को नहीं छोड़ा।

उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा जनता के अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी।

अमराराम ने यह भी कहा कि पार्टी “बांटो और राज करो” की नीतियों के खिलाफ अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी।

लोकतंत्र और मीडिया स्वतंत्रता पर सवाल

अपने संबोधन में अमराराम ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में मीडिया की स्वतंत्रता पर भी दबाव बनाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर पत्रकारों को कवरेज से रोका जा रहा है और संसद में भी मीडिया की पहुंच सीमित की जा रही है। उनके अनुसार यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

आर्थिक नीतियों पर केंद्र सरकार की आलोचना

सांसद अमराराम ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश की संपत्ति निजी कंपनियों के हाथों में सौंपी जा रही है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ा है।

उन्होंने यह भी कहा कि बड़े आर्थिक घोटालों के आरोपी देश छोड़कर भाग चुके हैं, लेकिन सरकार उन्हें वापस लाने में सफल नहीं हो पाई है। इसके विपरीत, विपक्षी नेताओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है, जो पक्षपातपूर्ण रवैया दर्शाता है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में माकपा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर रोक नहीं लगाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और सरकार की नीतियों के विरोध में लगातार संघर्ष जारी रखेंगे।

राजनीतिक तनाव और बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप

इस प्रदर्शन के बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ माकपा इसे लोकतंत्र और विपक्ष के अधिकारों पर हमला बता रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है, खासकर जब चुनावी माहौल या बड़े राजनीतिक फैसलों का समय नजदीक आएगा।

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