झुंझुनूं में कालिका पुलिस यूनिट की 8 टीमें स्कूल, कॉलेज, पार्क और सार्वजनिक स्थानों पर सख्त निगरानी कर रही हैं। सिविल ड्रेस में डिकॉय ऑपरेशन से मनचलों पर कार्रवाई तेज हुई है, जिससे महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ी है।
झुंझुनू: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस ने एक विशेष पहल शुरू की है, जिसे ‘कालिका पुलिस यूनिट’ कहा जाता है। इस यूनिट का मुख्य उद्देश्य स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर, बस स्टैंड, बाजार और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ और मनचलों की गतिविधियों पर रोक लगाना है। लगातार चल रही निगरानी और कार्रवाई के चलते जिले में सुरक्षा का माहौल पहले की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है।
सिविल ड्रेस में काम करने वाली विशेष टीम
कालिका पुलिस यूनिट की सबसे खास बात यह है कि इसके सदस्य सिविल ड्रेस में रहते हुए आम लोगों के बीच काम करते हैं। यह टीम किसी प्रचार या प्रदर्शन के बजाय बैकग्राउंड में रहकर निगरानी करती है। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पुलिसकर्मी सामान्य नागरिकों की तरह मौजूद रहते हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। इसका फायदा यह हुआ है कि मनचलों को पहचानना और पकड़ना आसान हो गया है, क्योंकि उन्हें यह अंदाजा नहीं रहता कि कौन व्यक्ति पुलिसकर्मी है।
डिकॉय ऑपरेशन से मिली सफलता
झुंझुनूं पुलिस ने ‘डिकॉय ऑपरेशन’ को एक प्रभावी रणनीति के रूप में अपनाया है। इस अभियान के तहत पुलिसकर्मी बसों, ऑटो और सार्वजनिक स्थानों पर आम यात्रियों की तरह यात्रा करते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी महिला या छात्रा को परेशान करता है तो उसे तुरंत मौके पर पकड़ लिया जाता है। इस तरह की कार्रवाई ने अपराधियों में डर पैदा किया है और सार्वजनिक परिवहन व भीड़भाड़ वाले इलाकों में छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी देखी गई है।

8 टीमों में विभाजित निगरानी व्यवस्था
कालिका यूनिट को जिले में आठ अलग-अलग टीमों में बांटा गया है, जो दो शिफ्टों में काम करती हैं। इसका उद्देश्य दिन और शाम दोनों समय संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी बनाए रखना है। ये टीमें मुख्य रूप से उन जगहों पर सक्रिय रहती हैं जहां महिलाओं और छात्राओं की आवाजाही अधिक होती है, जैसे शैक्षणिक संस्थान, कोचिंग सेंटर, बाजार और पार्क। इस व्यवस्थित निगरानी प्रणाली ने पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया है।
ग्राउंड लेवल पर बहुस्तरीय कार्यप्रणाली
कालिका यूनिट केवल गिरफ्तारी या कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुस्तरीय रणनीति पर काम करती है। किसी भी सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचना इस यूनिट की प्राथमिकता है, जिससे स्थिति को बिगड़ने से पहले नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा, संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ कर उनकी गतिविधियों की जांच की जाती है। कई मामलों में युवाओं को समझाकर सुधार की दिशा में प्रेरित किया जाता है। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को अनुशासन और सम्मानजनक व्यवहार के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी सुरक्षा और आत्मविश्वास
कालिका यूनिट की सक्रियता के बाद झुंझुनूं के सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। पार्क, बस स्टैंड और बाजार जैसे स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी से लोगों में विश्वास बढ़ा है। खासकर छात्राओं और महिलाओं ने अब खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करना शुरू किया है। पहले जहां शाम के समय आवाजाही को लेकर असुरक्षा की भावना रहती थी, वहीं अब स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।
समाज में सकारात्मक बदलाव
इस पहल का असर केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। असामाजिक तत्वों की गतिविधियों में कमी आई है और युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ी है। पुलिस और आम जनता के बीच भरोसे का रिश्ता मजबूत हुआ है। यह मॉडल यह दिखाता है कि यदि पुलिसिंग को आधुनिक और संवेदनशील तरीके से लागू किया जाए, तो समाज में सुरक्षित वातावरण बनाया जा सकता है।










