जयपुर एयरपोर्ट पर फर्जी वीजा रैकेट का खुलासा: ईराक जाने की कोशिश कर रहे तीन लोग गिरफ्तार

जयपुर एयरपोर्ट पर फर्जी टूरिस्ट वीजा के जरिए इराक जाने की कोशिश कर रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब फर्जी वीजा नेटवर्क की जांच कर रही है।

जयपुर एयरपोर्ट पर फर्जी टूरिस्ट वीजा के जरिए इराक जाने की कोशिश कर रहे तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में एजेंट द्वारा फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने का खुलासा हुआ। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित सांगानेर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर फर्जी टूरिस्ट वीजा के जरिए विदेश यात्रा करने की कोशिश कर रहे तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज फर्जीवाड़े और अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है। पुलिस अब उन एजेंटों और गिरोहों की तलाश में जुटी है, जो लोगों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेश भेजने का काम कर रहे हैं।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन संदिग्ध टूरिस्ट वीजा बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर वे ईराक जाने की तैयारी में थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों को एक एजेंट ने टूरिस्ट वीजा के जरिए विदेश भेजने का झांसा दिया था।

एयरपोर्ट जांच में हुआ खुलासा

जयपुर एयरपोर्ट पर मंगलवार को नियमित दस्तावेज जांच के दौरान अधिकारियों को तीन यात्रियों के वीजा पर संदेह हुआ। जांच टीम ने जब दस्तावेजों की गहन जांच की, तो वीजा में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए।

संदेह बढ़ने पर तीनों यात्रियों को तत्काल रोका गया और एयरपोर्ट थाना पुलिस को सूचना दी गई। पूछताछ के दौरान तीनों व्यक्ति घबरा गए, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर विस्तृत जांच शुरू की गई।

पुलिस के अनुसार, आरोपी फर्जी टूरिस्ट वीजा के आधार पर ईराक के बगदाद जाने की कोशिश कर रहे थे।

तीन राज्यों से जुड़े आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले व्यक्तियों के रूप में हुई है। इनमें सुरेश कुमार (47) निवासी अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश, आलोक कुमार सिंह (31) निवासी पटना, बिहार और रुपेश यादव (32) निवासी पूर्वी चंपारण, बिहार शामिल हैं।

पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपियों को एक एजेंट ने जयपुर बुलाया था और उन्हें विदेश यात्रा के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे।

एजेंट ने दिया विदेश भेजने का झांसा

डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि तीनों आरोपियों के पास पहले से ईराक का मल्टीपल वीजा था, लेकिन उस वीजा के जरिए वे यात्रा नहीं कर सकते थे।

इसके बाद जयपुर के एक एजेंट, जिसकी पहचान मुकेश लाखर के रूप में हुई है, ने उन्हें टूरिस्ट वीजा बनवाने का आश्वासन दिया।

पुलिस के मुताबिक एजेंट ने तीनों को 17 मई को जयपुर बुलाया और उन्हें पोलोविक्ट्री क्षेत्र स्थित एक होटल में ठहराया। अगले दिन उन्हें कथित तौर पर फर्जी टूरिस्ट वीजा उपलब्ध कराया गया।

एयरपोर्ट पर क्या बोलना है, इसकी भी दी गई थी ट्रेनिंग

जांच में यह भी सामने आया है कि एजेंट ने आरोपियों को एयरपोर्ट पर पूछताछ के दौरान क्या जवाब देना है, इसकी भी जानकारी दी थी।

उन्हें बताया गया था कि यदि एयरपोर्ट अधिकारी पूछताछ करें तो वे कहें कि बगदाद में भेजी गई एक मशीन में खराबी आ गई है और उसी सिलसिले में वे यात्रा कर रहे हैं।

पुलिस का मानना है कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

फर्जी वीजा नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस ने इस मामले में बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फर्जी वीजा तैयार करने और लोगों को विदेश भेजने वाले इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंट, फर्जी दस्तावेज सप्लायर और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही वीजा फ्रॉड की घटनाएं

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फर्जी वीजा और अवैध इमिग्रेशन से जुड़े मामलों में तेजी आई है। कई एजेंट बेरोजगारी और विदेश में नौकरी की चाह रखने वाले लोगों को आसान तरीके से विदेश भेजने का झांसा देते हैं।

ऐसे मामलों में अक्सर फर्जी वीजा, नकली आमंत्रण पत्र, जाली रोजगार दस्तावेज और गलत यात्रा उद्देश्य का इस्तेमाल किया जाता है।

भारत समेत कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां अब एयरपोर्ट पर दस्तावेज सत्यापन को अधिक सख्त बना रही हैं ताकि अवैध यात्रा और मानव तस्करी जैसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।

एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था की हुई सराहना

इस मामले के सामने आने के बाद जयपुर एयरपोर्ट की सुरक्षा और दस्तावेज जांच प्रणाली की सराहना की जा रही है।

यदि समय रहते दस्तावेजों में गड़बड़ी पकड़ में नहीं आती, तो आरोपी विदेश पहुंच सकते थे, जिससे बाद में अंतरराष्ट्रीय कानूनी और सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो सकती थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट पर प्रशिक्षित इमिग्रेशन अधिकारियों और तकनीकी जांच प्रणाली की वजह से ऐसे मामलों का खुलासा संभव हो पा रहा है।

लोगों को सतर्क रहने की सलाह

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे विदेश यात्रा, नौकरी या वीजा प्रक्रिया के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों और वैध माध्यमों का ही उपयोग करें।

अधिकारियों ने कहा कि किसी भी एजेंट के झांसे में आकर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करना गंभीर अपराध है, जिसके कानूनी परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

विदेश यात्रा के इच्छुक लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने वीजा और यात्रा दस्तावेजों की पूरी तरह जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसियों को दें।

मानव तस्करी और साइबर नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं तार

जांच एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह नेटवर्क केवल फर्जी वीजा तक सीमित न होकर मानव तस्करी, अवैध रोजगार नेटवर्क या साइबर फ्रॉड से भी जुड़ा हो।

पुलिस अब होटल रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक लेनदेन और डिजिटल संपर्कों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

फिलहाल तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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