भोपाल के कोलार इलाके में एमबीबीएस छात्र सचिन सिंह ने पांचवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। वह महिला मित्र द्वारा अनदेखा किए जाने से तनाव में था। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और कॉलेज प्रशासन भी सतर्क है।
Madhya Pradesh: भोपाल के कोलार इलाके में शनिवार सुबह एमबीबीएस छात्र सचिन सिंह ने अपने फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा दी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। रविवार शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। टीआई संजय सोनी के अनुसार, सचिन एलएन मेडिकल कॉलेज में थर्ड ईयर का छात्र था। वह प्रीमियम टावर फेस-1 की पांचवीं मंजिल पर किराए के फ्लैट में रहता था। फ्लैट में उसके साथ तीन अन्य छात्र भी रहते थे।
पुलिस ने बताया कि घटना के समय फ्लैट में कोई और गंभीर रूप से शामिल नहीं था और वह अकेला बालकनी में था। मामले की जांच में यह सामने आया कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव में था।
महिला मित्र से दूरी और मानसिक दबाव
पुलिस जांच में पता चला कि सचिन की कॉलेज में एक महिला मित्र से नजदीकी थी। पिछले तीन महीनों से छात्रा ने उससे बात करना बंद कर दिया था। इसके कारण सचिन लगातार परेशान और डिप्रेशन में था। सचिन के दोस्तों ने बताया कि शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात वह महिला मित्र से मिलने गया था। वहां उसने आत्महत्या की बात कही। महिला मित्र ने अपने दोस्तों को सचिन की मानसिक स्थिति से सतर्क रहने के लिए सूचना दी।

फ्लैट लौटने के बाद वह सामान्य व्यवहार करता दिखा और रात को सो गया। सुबह अचानक उसने बालकनी से कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस ने बताया कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
परिवार और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
परिवार ने बताया कि सचिन मानसिक रूप से बहुत संवेदनशील और जिम्मेदार छात्र था। वह अपने भविष्य के लिए हमेशा योजनाएं बनाता था, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में आने वाले तनाव ने उसे गंभीर स्थिति में डाल दिया। कॉलेज प्रशासन को भी घटना की सूचना दी गई है। प्रशासन छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देने की बात कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवा डिप्रेशन और अकेलेपन के कारण कभी-कभी चरम कदम उठा लेते हैं।
पुलिस ने परिवार और फ्लैट में रहने वाले अन्य छात्रों से पूछताछ शुरू कर दी है। सभी पहलुओं की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आत्महत्या के पीछे केवल व्यक्तिगत तनाव ही कारण था या कोई और दबाव भी था।
मनोवैज्ञानिक चेतावनी
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि युवा छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक अवहेलना, अकेलेपन या निराशा डिप्रेशन का कारण बन सकती है।
पुलिस और प्रशासन ने छात्र जीवन में तनाव को कम करने के लिए मार्गदर्शन और सहायता देने की जरूरत पर जोर दिया है। फ्लैट में रहने वाले अन्य छात्रों को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है।











