प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य पद को लेकर अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य रविवार शाम मिल सकते हैं। प्रशासन ने नोटिस जारी कर स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की है।
UP News: उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य रविवार शाम को प्रयागराज के माघ मेले में अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर सकते हैं। यह जानकारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने दी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में शंकराचार्य के पद को लेकर अधिकारियों के खिलाफ अपनी मांग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं ने भी उनसे मुलाकात की है।
अनशन की पृष्ठभूमि
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का अनशन माघ मेले के दौरान शुरू हुआ था। उनका मुख्य मुद्दा प्रशासन की ओर से शंकराचार्य के पद के संदर्भ में किए गए निर्णय और अधिकारियों के रवैये को लेकर है। उन्होंने कहा था कि उनके अधिकारों का हनन किया गया और इसे सही करने की आवश्यकता है। इस बीच प्रशासन ने भी शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस जारी किया है।
डिप्टी सीएम की संभावित पहल

केशव प्रसाद मौर्य ने पहले ही बयान दिया था कि वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अनशन खत्म करने की विनती करेंगे। उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने और कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया था। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि डिप्टी सीएम माघ मेले में पहुंचकर अनशन को समाप्त कराने के लिए सक्रिय कदम उठाएंगे या केवल संवाद करेंगे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की प्रतिक्रिया
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें समझ में आ गया है कि उनके अधिकारियों से कुछ गलती हुई है। उन्होंने डिप्टी सीएम के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि केशव प्रसाद मौर्य को ही उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहिए था। यह बयान राजनीति और प्रशासन के बीच संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
माघ मेले में प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हों। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन प्रशासन के समक्ष एक चुनौती बन गया है। अधिकारियों ने नोटिस जारी कर शंकराचार्य के पद और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता मांगी है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मेला शांतिपूर्ण ढंग से चले और किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।








