कोटा पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक कार से सीट के नीचे बने गुप्त बॉक्स में छिपाए 2.24 करोड़ रुपये बरामद किए। मामले में हवाला रैकेट का खुलासा हुआ है और दो आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
कोटा: राजस्थान के कोटा जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 2.24 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। यह रकम एक संदिग्ध एसयूवी (XUV-300) कार की सीट के नीचे बने गुप्त बॉक्स में छिपाकर रखी गई थी। इस मामले में दो युवकों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ जारी है।
यह कार्रवाई कोटा ग्रामीण पुलिस द्वारा चेचट थाना क्षेत्र के मोड़क रोड स्थित 8-लाइन तिराहे पर की गई नियमित नाकाबंदी के दौरान की गई।
पुलिस ने कैसे पकड़ी संदिग्ध कार?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार रात को नाकाबंदी के दौरान गुजरात नंबर की एक संदिग्ध एसयूवी को रोका गया। पुलिस ने जब वाहन को रुकने का इशारा किया तो चालक ने तेज गति से भागने की कोशिश की।
स्थिति संदिग्ध लगने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर वाहन को रोक लिया। इसके बाद कार सवार दोनों युवकों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।
सीट के नीचे बने गुप्त बॉक्स से मिला कैश
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिए। इसके बाद पुलिस ने वाहन की गहन तलाशी ली।
तलाशी के दौरान कार की सीटों के नीचे दो गुप्त बॉक्स मिले, जिनमें भारी मात्रा में नकदी छिपाई गई थी। जांच के बाद कुल 2 करोड़ 24 लाख रुपये बरामद किए गए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम को इस तरह छिपाकर ले जाना हवाला या अवैध वित्तीय लेनदेन की ओर इशारा करता है।
हवाला नेटवर्क से जुड़े होने का शक
जांच में सामने आया है कि यह मामला कथित हवाला नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि यह पैसा गुजरात के अहमदाबाद ले जाया जा रहा था और इसे उत्तर प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज से एकत्र किया गया था।
पुलिस के अनुसार, यह रकम कथित रूप से “बाबूलाल कंपनी” नाम की एक फर्म से जुड़ी हो सकती है, जो हवाला ट्रांजैक्शन से संबंधित गतिविधियों में शामिल बताई जा रही है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसियां कर रही हैं।

2 साल से कम वेतन पर चल रहा था नेटवर्क
जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है कि पकड़े गए दोनों युवक पिछले लगभग दो वर्षों से इस नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे। उन्हें हर महीने केवल 25 से 30 हजार रुपये दिए जाते थे।
पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जिसमें छोटे स्तर पर काम करने वाले लोग नकदी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते हैं, जबकि असली मास्टरमाइंड अभी जांच के दायरे से बाहर हैं।
गिरफ्तार आरोपी और पूछताछ
पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उनकी पहचान अहमदाबाद से जुड़े व्यक्तियों के रूप में की गई है।
अधिकारियों के अनुसार, दोनों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रकम का असली स्रोत क्या है और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में इनकम टैक्स विभाग और अन्य वित्तीय जांच एजेंसियों को भी सूचित किया जाएगा ताकि पूरे नेटवर्क की जांच की जा सके।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
कोटा ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच अब कई स्तरों पर की जा रही है। वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और संदिग्ध कंपनियों की जांच भी शुरू की जाएगी।
जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला केवल हवाला का है या इसके पीछे किसी बड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का संबंध भी है।
भारत में हवाला नेटवर्क की चुनौती
भारत में हवाला और अवैध नकदी लेनदेन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहे हैं। ऐसे नेटवर्क अक्सर नकदी को एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना रिकॉर्ड के ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवाला सिस्टम का उपयोग टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध कारोबार को सपोर्ट करने के लिए किया जाता है।










