कर्नाटक में संत के आरोप के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। बजट में डीके शिवकुमार समर्थक मठों को फंड नहीं मिलने का दावा किया गया, जिससे कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और सत्ता संघर्ष की चर्चा तेज हो गई है।
Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य के बजट (Budget) को लेकर एक बड़े संत ने ऐसा दावा किया है, जिसने सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को फिर से सामने ला दिया है। आरोप है कि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का समर्थन करने वाले मठों को इस बार बजट में कोई फंड नहीं दिया गया। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है।
संत प्रणवानंद स्वामीजी का बड़ा आरोप
प्रख्यात संत प्रणवानंद स्वामीजी ने सीधे तौर पर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार ने जानबूझकर उन मठों को नजरअंदाज किया है, जो डीके शिवकुमार का समर्थन करते हैं।
स्वामीजी ने दावा किया कि हाल ही में पेश किए गए बजट में ऐसे मठों के लिए “एक रुपया भी” आवंटित नहीं किया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक भेदभाव (political discrimination) बताया और कहा कि यह फैसला पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण नजर आता है।
डीके शिवकुमार के समर्थन से जुड़ा विवाद
यह पूरा मामला डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा से जुड़ा हुआ है। कर्नाटक में लंबे समय से सत्ता-साझाकरण (power sharing) को लेकर अटकलें चल रही हैं। प्रणवानंद स्वामीजी खुद शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने के समर्थक माने जाते हैं। ऐसे में उनका यह बयान सीधे तौर पर राज्य की सत्ता में चल रही अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करता है।
विधायक इकबाल हुसैन के बयान से बढ़ी चर्चा
इस विवाद को और हवा तब मिली जब कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने सार्वजनिक रूप से अपने क्षेत्र रामनगर के लिए कम फंड मिलने पर नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से अपने क्षेत्र के विकास के लिए फंड की मांग की, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज किया गया। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर गुटबाजी (factionalism) की चर्चा और तेज हो गई।
बजट में फंड आवंटन पर उठे सवाल
स्वामीजी ने आरोप लगाया कि जिन मठों के प्रमुखों ने डीके शिवकुमार से मुलाकात कर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया था, उन्हें इस बार बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जानबूझकर ऐसे संस्थानों को फंड और जमीन आवंटन (allocation) से वंचित रखा, जबकि अन्य संस्थानों को लाभ दिया गया। इस तरह के आरोपों ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
700 किलोमीटर पदयात्रा का भी जिक्र
प्रणवानंद स्वामीजी ने अपनी हाल की 700 किलोमीटर की पदयात्रा (padayatra) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उन्होंने समुदाय की समस्याओं को सामने रखा था। स्वामीजी का दावा है कि इस दौरान यह संदेश दिया गया कि जो लोग डीके शिवकुमार का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें किसी तरह की सहायता नहीं दी जाएगी। इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
मुख्यमंत्री पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप
संत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक सोच के आधार पर फैसले ले रही है। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले और समाज के लिए काम करने वाले लोगों को भी अब निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब अन्य मठों को फंड और सुविधाएं दी जा रही हैं, तो फिर कुछ खास मठों को ही क्यों बाहर रखा गया।
शिवकुमार के समर्थन में संत का बयान
विवाद के बीच प्रणवानंद स्वामीजी ने डीके शिवकुमार के प्रति अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने साफ कहा कि वे अपने रुख से पीछे नहीं हटेंगे।
स्वामीजी ने कहा कि उन्होंने जो वचन दिया है, वह उससे पीछे नहीं हटेंगे और लगातार यह मांग करते रहेंगे कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए। यह बयान कर्नाटक की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान को और उजागर करता है।
इन सभी घटनाओं के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। एक तरफ सिद्धारमैया और दूसरी तरफ डीके शिवकुमार के समर्थकों के बीच खींचतान की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।









