कर्नाटक के डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सोमवार को सीएम विवाद पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य में चल रहे नेतृत्व विवाद को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से पार्टी की उच्च कमान की मौजूदगी में चर्चा की है और दोनों नेता इस मसले पर एक निष्कर्ष पर पहुंच गए हैं।
बेंगलुरु: कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री विवाद ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने सोमवार को इस मामले पर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित 140 विधायकों का समर्थन है। साथ ही, दोनों नेताओं ने पार्टी आला कमान की मौजूदगी में बैठक कर एक निष्कर्ष पर पहुंचने की पुष्टि की है।
डीके शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ पार्टी शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में गहन चर्चा की। उन्होंने कहा, हमने मिलकर चर्चा की और एक निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। हर चीज का एक समय होता है और वक्त सब कुछ स्पष्ट कर देगा। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि वे इस निर्णय को मीडिया के सामने अभी सार्वजनिक नहीं करेंगे और इसे उचित समय पर साझा करेंगे।

दिल्ली दौरे और कांग्रेस आला कमान से मुलाकात
कुछ दिनों से शिवकुमार दिल्ली में सक्रिय थे। उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक और सरकारी मामलों के सिलसिले में राजधानी गए थे। उनके अनुसार मीडिया में लगातार यह खबरें आ रही थीं कि उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने का समय नहीं मिला। डीके शिवकुमार ने कहा, मैं तस्वीरें दिखा सकता हूं कि मैं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बैठकर चर्चा कर रहा था। फिर भी मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि मैं किसी से नहीं मिला।
उन्होंने अपने दिल्ली दौरे और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से हुई बैठकों की जानकारी मीडिया के सवालों के जवाब में साझा की। अपने भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश की टिप्पणी पर शिवकुमार ने कहा, मेरा भाई कह रहे हैं, पार्टी कार्यकर्ता कह रहे हैं और आप (मीडिया) भी यही कह रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी अन्य सार्वजनिक टिप्पणी से फिलहाल बचना ही बेहतर समझा।
140 विधायकों का समर्थन
डीके शिवकुमार ने दावा किया कि उनके समर्थन में मुख्यमंत्री सहित 140 विधायक हैं। उन्होंने कहा, क्या आपको पता है कि मुख्यमंत्री और मैंने क्या चर्चा की? हमने मिलकर पार्टी की शीर्ष कमान के सामने क्या निर्णय लिया, इसका खुलासा मैं अभी नहीं कर सकता। हर चीज का एक समय होता है। उनका इशारा साफ था कि इस बैठक ने कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व विवाद को समाप्त करने या अगले चरण की रूपरेखा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।










