लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव खारिज, बीजेपी ने कहा- ‘कांग्रेस और सहयोगियों की साजिश हुई नाकाम’

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव खारिज, बीजेपी ने कहा- ‘कांग्रेस और सहयोगियों की साजिश हुई नाकाम’

Lok Sabha में अध्यक्ष Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए प्रस्ताव को बुधवार को ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इसके बाद Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने की Congress की “साजिश” नाकाम हो गई।

नई दिल्ली: भारत की संसद में बुधवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब Om Birla को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाया गया प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। प्रस्ताव के खारिज होने के बाद सत्तारूढ़ दल Bharatiya Janata Party (बीजेपी) ने विपक्ष, खासकर Indian National Congress, पर तीखा हमला करते हुए कहा कि संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश असफल हो गई।

यह प्रस्ताव Lok Sabha में चर्चा के बाद ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की “राजनीतिक रणनीति की विफलता” करार दिया।

संसदीय कार्य मंत्री का विपक्ष पर हमला

प्रस्ताव खारिज होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने विपक्ष के आरोपों की सच्चाई को सामने ला दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार साबित हुए हैं। रीजीजू ने कहा कि लोकसभा में हुई बहस के दौरान गृह मंत्री Amit Shah ने विपक्ष के सभी आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। 

उनके अनुसार, इस बहस ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार और सदन के कामकाज को लेकर लगाए गए कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में हुई चर्चा ने विपक्ष की रणनीति को उजागर कर दिया और यह साबित हो गया कि प्रस्ताव के पीछे राजनीतिक उद्देश्य अधिक थे।

एनडीए सांसदों को धन्यवाद

बीजेपी नेताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन National Democratic Alliance (एनडीए) के सांसदों को धन्यवाद दिया। पार्टी के अनुसार, गठबंधन के सभी सदस्यों ने लोकसभा अध्यक्ष के प्रति समर्थन जताते हुए प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट होकर मतदान किया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि संसद की कार्यवाही और उसकी गरिमा को बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है। पार्टी का दावा है कि एनडीए सांसदों ने इस जिम्मेदारी को निभाते हुए अध्यक्ष के पक्ष में मजबूती से समर्थन दिया।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री Ravi Shankar Prasad ने भी प्रस्ताव खारिज होने के बाद विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की योजना संसद की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। प्रसाद ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव राजनीतिक लाभ के लिए किया गया प्रयास था, जिसे सदन ने स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार, संसद की परंपराओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कदमों से बचना चाहिए।

बहस के दौरान हंगामे का आरोप

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने यह भी आरोप लगाया कि बहस के दौरान विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने जानबूझकर हंगामा किया। उनका कहना था कि जब गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दे रहे थे, तब कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने व्यवधान उत्पन्न किया। रीजीजू ने दावा किया कि विपक्ष के भीतर भी इस प्रस्ताव को लेकर एकजुटता नहीं थी। उनके अनुसार, कई विपक्षी सांसदों को यह अंदाजा था कि प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिलेगा, इसलिए बहस के दौरान व्यवधान पैदा करने की रणनीति अपनाई गई।

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