Parliament Update: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद स्पीकर ओम बिरला की वापसी, 12 घंटे चली चर्चा

Parliament Update: अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद स्पीकर ओम बिरला की वापसी, 12 घंटे चली चर्चा

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया। इसके बाद उन्होंने सदन में लौटकर कहा कि संसद में सभी सदस्यों को नियमों का पालन करना होगा और कोई भी सदस्य नियमों से ऊपर नहीं है।

New Delhi: लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला गुरुवार को एक बार फिर सदन में लौट आए। उनके खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को ध्वनिमत से गिर गया था। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने सदन में वापसी करते हुए लोकसभा को संबोधित किया और अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को नियमों से ऊपर जाकर बोलने का विशेषाधिकार नहीं है और सभी को तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद ओम बिरला कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही से दूर रहे थे। अब प्रस्ताव खारिज होने के बाद उन्होंने सदन में आकर अपनी बात रखी और लोकसभा के संचालन को लेकर अपना पक्ष साफ किया।

संसदीय इतिहास में तीसरी बार हुई ऐसी चर्चा

लोकसभा को संबोधित करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह तीसरी बार था जब लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यह संसदीय लोकतंत्र की एक प्रक्रिया है और इसमें सदन के सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया।

उन्होंने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव पर करीब 12 घंटे तक चर्चा हुई जिसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने अपने विचार रखे। इस दौरान कई सदस्यों ने उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाए जबकि कई सदस्यों ने उनका समर्थन भी किया।

सदन में हर सदस्य को बोलने का अधिकार

ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सदन में हर सदस्य को अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा लोकतंत्र की आत्मा है और सभी सदस्यों को नियमों और प्रक्रियाओं के भीतर रहकर अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार ऐसे सदस्य भी होते हैं जो सदन की कार्यवाही में भाग लेने से हिचकते हैं। ऐसे सदस्यों को भी उन्होंने हमेशा प्रोत्साहित किया ताकि वे अपने क्षेत्र और जनता की आवाज संसद में उठा सकें।

विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। विपक्ष का आरोप था कि सदन में उनकी आवाज दबाई जाती है और उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता।

इन आरोपों का जवाब देते हुए ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे में सदन का संचालन पूरी निष्पक्षता और नियमों के अनुसार होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सदन का कामकाज पारदर्शी और नियमों के तहत चले।

अध्यक्ष पद की गरिमा पर दिया जोर

अपने संबोधन में ओम बिरला ने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं होती बल्कि यह पूरे सदन की प्रतिष्ठा और परंपरा का प्रतीक होती है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष ने उन्हें हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया था, तब उन्होंने खुद को सदन की कार्यवाही से दूर रखा ताकि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके। सभी सदस्यों का धन्यवाद किया जिन्होंने बहस के दौरान उनका समर्थन किया या आलोचनात्मक सुझाव दिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में आलोचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितना समर्थन।

राहुल गांधी को बोलने से रोकने के आरोप पर प्रतिक्रिया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोकने के आरोप भी अविश्वास प्रस्ताव के दौरान चर्चा का विषय बने थे। इस मुद्दे पर स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में हर सदस्य को बोलने का अधिकार है लेकिन यह अधिकार नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही मिलता है। संसद में किसी भी सदस्य को नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और मंत्री भी सदन में बयान देने के लिए नियमों के तहत नोटिस देते हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि किसी एक व्यक्ति को विशेष अधिकार दिया जा सकता है।

नियमों से ऊपर कोई नहीं

स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष किसी भी समय किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा कोई विशेषाधिकार नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में बने नियम सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। चाहे वह प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों या विपक्ष के नेता, सभी को नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ये नियम सदन ने ही बनाए हैं और उन्हें अध्यक्ष के रूप में इन नियमों का पालन कराना उनकी जिम्मेदारी है।

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