हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मिड-डे मील को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। पतलीकूहल क्षेत्र के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बाड़ी में खीर खाने के बाद बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर जैसी शिकायतें हुईं, जिसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पतलीकूहल समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं में उपचार के लिए पहुंचाया गया। अलग-अलग रिपोर्टों में बीमार बच्चों की संख्या 35 से 40 के बीच बताई गई है, जबकि स्थानीय अपडेट के अनुसार 39 बच्चे प्रभावित हुए हैं। 15 बच्चों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।
घटना मंगलवार को सामने आई, जब स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील के तहत खीर परोसी गई थी। खाना खाने के कुछ समय बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। छुट्टी के बाद जब बच्चे घर पहुंचे तो कुछ की हालत और खराब हो गई। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। बड़ी संख्या में बच्चों के एक साथ बीमार पड़ने की सूचना से स्वास्थ्य केंद्र में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
बीमार बच्चों में बाड़ी के अलावा जैंडी, बशकोला, रंखड़ू और बाजगाड़ी सहित आसपास के गांवों के छात्र-छात्राएं शामिल बताए गए हैं। परिजनों ने बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने बच्चों की जांच कर उपचार शुरू किया और उनकी स्थिति पर निगरानी रखी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी बच्चे की हालत गंभीर नहीं बताई गई है।
अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चों में सामने आए लक्षणों को देखते हुए डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बच्चों की तबीयत खीर खाने से ही बिगड़ी या इसके पीछे किसी अन्य खाद्य सामग्री अथवा पानी की वजह रही। बीमारी के वास्तविक कारण का पता जांच और सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
मामला सामने आने के बाद अब स्कूल में तैयार की गई खीर की गुणवत्ता और उसे बनाने में इस्तेमाल हुई सामग्री जांच के दायरे में आ गई है। दूध, पानी, चीनी और अन्य सामग्री के सैंपल लिए जाने की संभावना है। इसके अलावा जिस स्थान पर खाना तैयार किया गया, वहां साफ-सफाई और खाद्य सामग्री के रखरखाव की स्थिति भी देखी जा सकती है।
एक साथ इतने बच्चों के बीमार पड़ने के बाद मिड-डे मील की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्कूलों में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन केवल पोषण उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि इसमें खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का भी विशेष महत्व है। किसी एक भोजन के बाद बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने पर यह जांच जरूरी हो जाती है कि भोजन तैयार करने से लेकर बच्चों को परोसने तक निर्धारित सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लिया। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ अस्पताल पहुंचे और बीमार बच्चों तथा उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया।
विधायक की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही गई है। SDM को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल में मिड-डे मील के लिए खीर कैसे तैयार की गई, उसमें इस्तेमाल सामग्री कहां से आई, भोजन की गुणवत्ता जांचने की क्या व्यवस्था थी और खाना परोसने से पहले किसी स्तर पर कोई गड़बड़ी सामने आई थी या नहीं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लेने की बात कही है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता बच्चों का स्वास्थ्य और घटना के वास्तविक कारण का पता लगाना है।
परिजनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में बच्चों को मिलने वाला भोजन सुरक्षित होना चाहिए, क्योंकि छोटे बच्चे भोजन की गुणवत्ता या उसमें किसी तरह की गड़बड़ी को खुद पहचान नहीं सकते। ऐसे में स्कूल प्रशासन और भोजन तैयार करने वालों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। बच्चों की निगरानी के साथ-साथ भोजन के नमूनों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि खीर या किसी अन्य सामग्री में संक्रमण अथवा खराबी मिलती है तो उससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि बीमारी की शुरुआत किस वजह से हुई।
दूषित पानी की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। चिकित्सकों ने शुरुआती तौर पर इस पहलू को भी जांच के दायरे में रखने की बात कही है। यदि भोजन और पानी दोनों के नमूने लिए जाते हैं तो रिपोर्ट के आधार पर बीमारी के स्रोत को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
स्कूलों में मिड-डे मील के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों को एक ही भोजन परोसा जाता है। इसलिए यदि भोजन में कोई समस्या हो तो कम समय में कई बच्चों की तबीयत प्रभावित हो सकती है। कुल्लू की यह घटना इसी वजह से गंभीर मानी जा रही है और जांच में भोजन की तैयारी तथा वितरण की पूरी प्रक्रिया को देखना जरूरी होगा।
बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद अभिभावक बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे। कई परिवार अपने बच्चों को लेकर चिंतित नजर आए। हालांकि उपचार मिलने के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार हुआ और 15 बच्चों को अस्पताल से छुट्टी भी दी गई है। बाकी बच्चों की स्थिति पर भी स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बनी हुई है।
घटना के बाद स्कूल और प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। मिड-डे मील तैयार करने वाली व्यवस्था में साफ पानी, ताजा खाद्य सामग्री, साफ बर्तन और भोजन की उचित निगरानी जैसे पहलुओं को प्राथमिकता देना जरूरी है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बारिश के मौसम में पानी और खाद्य सामग्री के दूषित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। नमी, लंबे समय तक रखी खाद्य सामग्री और दूषित पानी जैसी स्थितियां स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। इसलिए मानसून के दौरान स्कूलों में भोजन की स्वच्छता को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।
प्रशासन की जांच के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि घटना केवल खीर से जुड़ी थी या मिड-डे मील की अन्य सामग्री भी प्रभावित थी। यदि केवल खीर खाने वाले बच्चों में ही लक्षण सामने आए हैं तो जांच का फोकस खीर की सामग्री और तैयारी प्रक्रिया पर अधिक रहेगा।
फिलहाल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार सबसे राहत वाली बात है। अस्पताल से 15 बच्चों को डिस्चार्ज किया जाना बताता है कि उपचार के बाद उनकी स्थिति बेहतर हुई है। हालांकि बाकी बच्चों को लेकर भी चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है, ताकि किसी बच्चे की हालत दोबारा खराब होने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।
मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चों के बीमार पड़ने की वास्तविक वजह क्या थी। तब तक फूड पॉइजनिंग को केवल प्रारंभिक आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है। किसी व्यक्ति या संस्था को जिम्मेदार ठहराने से पहले प्रशासनिक और स्वास्थ्य जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
कुल मिलाकर, कुल्लू के पतलीकूहल क्षेत्र स्थित बाड़ी प्राथमिक स्कूल में मिड-डे मील की खीर खाने के बाद करीब 39 बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और चक्कर जैसी शिकायतों के बाद अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के बाद 15 बच्चों को छुट्टी मिल गई। डॉक्टरों ने शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है, जबकि दूषित पानी की संभावना भी जांच के दायरे में है। अब SDM पूरे मामले की जांच करेंगे और खीर, पानी व अन्य खाद्य सामग्री के सैंपल की रिपोर्ट से बीमारी की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है।












