सोशल मीडिया से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली Kusha Kapila इन दिनों अपनी वेब सीरीज Maamla Legal Hai के दूसरे सीजन को लेकर चर्चा में हैं। ‘थैंक यू फॉर कमिंग’ और ‘सुखी’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं कुशा ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री में चल रही ‘इन्फ्लुएंसर्स बनाम एक्टर्स’ बहस पर खुलकर अपनी राय रखी है।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: Kusha Kapila, जो साउथ दिल्ली वाली आंटी की मिमिक्री करके सोशल मीडिया पर स्टार बनीं, अब अभिनय की दुनिया में भी सक्रिय हैं। उन्होंने 'Thank You for Coming' और 'Sukhee' जैसी फिल्मों में काम किया है और दर्शकों का ध्यान खींचा है। इस समय कुशा कपिला वेब सीरीज 'MAMLA Legal Hai 2' को लेकर चर्चा में हैं। खास बात यह है कि मुंबई शिफ्ट हो चुकीं कुशा इस सीरीज में दिल्ली के Patparganj Court में वकालत करती दिखेंगी। यह सीरीज उनके एक्टिंग करियर के नए आयाम को दर्शाती है और दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा रही है।
एक्टर्स का गुस्सा बिल्कुल जायज है - कुशा कपिला
कुशा कपिला ने स्वीकार किया कि कई बार फिल्म और वेब इंडस्ट्री में केवल सोशल मीडिया फॉलोअर्स के आधार पर कास्टिंग की जाती है, जिससे प्रशिक्षित अभिनेताओं में नाराजगी होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अगर किसी इन्फ्लुएंसर को सिर्फ मार्केटिंग के उद्देश्य से लिया जाता है, तो यह पेशेवर कलाकारों के लिए निराशाजनक हो सकता है। इस मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट रूप से एक्टर्स का समर्थन किया।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ कंटेंट क्रिएटर्स गंभीरता से अभिनय में करियर बनाना चाहते हैं और उन्हें सीखने व खुद को साबित करने का अवसर मिलना चाहिए।
दिल्ली से मुंबई तक का सफर

कुशा कपिला का सफर दिल्ली से मुंबई तक केवल भौगोलिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विकास की कहानी भी है। दिल्ली में पली-बढ़ीं कुशा बताती हैं कि थिएटर और परफॉर्मिंग आर्ट्स के प्रति उनका रुझान यहीं से शुरू हुआ। मुंबई आने के बाद उन्होंने इस शहर की सांस्कृतिक विविधता को अपनाया। उनके अनुसार, मुंबई एक ऐसा शहर है जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ रहते हैं और यह सह-अस्तित्व उन्हें बेहद आकर्षित करता है। कुशा ने यह भी कहा कि उन्होंने ‘दिल्ली वाली ऐंठ’ को पीछे छोड़ दिया है और अब वे ज्यादा संतुलित और विनम्र जीवनशैली अपनाती हैं।
सोशल मीडिया स्टार होने के कारण कुशा कपिला को भी ट्रोलिंग और पर्सनल लाइफ पर आलोचना का सामना करना पड़ा है, खासकर उनके तलाक और निजी फैसलों को लेकर। इस पर उन्होंने कहा कि समय के साथ कलाकार यह सीखते हैं कि अपनी निजी जिंदगी को कितना सार्वजनिक रखना है। उन्होंने माना कि करियर की शुरुआत में क्रिएटर्स ज्यादा खुलकर अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अनुभव के साथ वे सीमाएं तय करना सीखते हैं।
कुशा का मानना है कि हर कलाकार को अपने शुरुआती दौर में बिना डर के एक्सपेरिमेंट करने की आजादी होनी चाहिए और यह क्रिएटिव ग्रोथ के लिए जरूरी है।
“हम पहली पीढ़ी के क्रिएटर्स हैं”
कुशा ने यह भी कहा कि मौजूदा डिजिटल युग में कंटेंट क्रिएटर्स एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पारंपरिक फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आते। उनके अनुसार, वे खुद को एक ऐसे मोड़ पर पाती हैं जहां उन्हें तय करना है कि आगे किस दिशा में बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अभिनय में सफल होने के लिए निरंतर सीखना, वर्कशॉप करना और असफलताओं से गुजरना जरूरी है।
मुंबई में बिताए अपने तीन वर्षों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वे धीरे-धीरे अभिनय की बारीकियां सीख रही हैं और इस प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।










