संसद में राहुल गांधी की टी-शर्ट पर बहस छिड़ी। इसपर अखिलेश यादव ने मजाकिया और व्यंग्यपूर्ण जवाब देकर ड्रेस कोड बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
UP News: संसद में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के टी-शर्ट पहनकर आने को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है और इस मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju द्वारा उठाए गए सवाल के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने इस पूरे विवाद पर हल्के लेकिन तीखे अंदाज में जवाब दिया है, जिसने इस बहस को और चर्चा में ला दिया है।
क्या संसद में लागू होगा ड्रेस कोड
जब Akhilesh Yadav से राहुल गांधी के संसद में टी-शर्ट पहनने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधे सवाल के बजाय एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि क्या अब संसद में ड्रेस कोड (dress code) लागू किया जाएगा और अगर ऐसा होता है तो यह तय कौन करेगा कि कौन क्या पहने। उनका कहना था कि लोकतंत्र में इस तरह के नियम लागू करना आसान नहीं है और इससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।
निक्कर वाले बयान से बढ़ी चर्चा
अखिलेश यादव ने अपने जवाब में व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या अब निक्कर (knicker) को ड्रेस कोड बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आज ड्रेस कोड की बात कर रहे हैं, उन्होंने खुद भी समय के साथ अपने पहनावे में बदलाव किया है। उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि पहनावा व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इसे लेकर सख्त नियम बनाना सही नहीं होगा। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसने बहस को और तेज कर दिया।
किरेन रिजिजू के बयान से शुरू हुआ विवाद

इस पूरे विवाद की शुरुआत Kiren Rijiju के बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि Rahul Gandhi जैसे बड़े पद पर बैठे नेता को संसद में बोलते समय परंपराओं (traditions), नियमों (rules) और शिष्टाचार (etiquette) का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर राहुल गांधी से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन औपचारिक मंच पर एक मर्यादा बनाए रखना जरूरी होता है।
राहुल गांधी के पहनावे पर जारी बहस
Rahul Gandhi अक्सर अपने अलग स्टाइल के लिए जाने जाते हैं और कई बार वह टी-शर्ट जैसे कैजुअल (casual) कपड़ों में नजर आते हैं। कुछ लोग इसे उनकी सादगी और आम लोगों से जुड़ाव का प्रतीक मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसद जैसे गंभीर मंच के अनुरूप नहीं मानते। यही वजह है कि उनके पहनावे को लेकर समय-समय पर बहस होती रहती है और यह मुद्दा अब फिर से चर्चा में आ गया है।
राजनीति में बढ़ा समर्थन और विरोध
इस मामले में Akhilesh Yadav का बयान यह भी दिखाता है कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया गठबंधन (INDIA alliance) का हिस्सा हैं, ऐसे में अखिलेश यादव का राहुल गांधी के समर्थन में बोलना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सत्तापक्ष इस मुद्दे को संसदीय मर्यादा से जोड़कर देख रहा है।
ड्रेस कोड बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता
यह पूरा विवाद अब एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है कि क्या संसद में ड्रेस कोड होना चाहिए या फिर नेताओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। एक पक्ष का मानना है कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए औपचारिक पहनावा जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता (freedom) से जोड़कर देख रहा है।









