LIC का शेयर लगातार दूसरे महीने दबाव में है। सरकारी हिस्सेदारी बिक्री की आशंका और डेथ क्रॉस जैसे निगेटिव टेक्निकल संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल शेयर में मजबूत रिकवरी के संकेत नजर नहीं आ रहे हैं।
LIC Share: लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी LIC का शेयर लगातार दूसरे महीने कमजोरी के संकेत दे रहा है। जनवरी महीने में अब तक शेयर करीब 1 फीसदी टूट चुका है, जबकि दिसंबर में इसमें लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार गिरते भाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब शेयर में कोई ठोस रिकवरी संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।
गिरावट की बड़ी वजह
LIC शेयर में आई इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर चल रही अटकलें मानी जा रही हैं। मौजूदा समय में केंद्र सरकार के पास LIC में करीब 96.5 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार इसे दो चरणों में घटाकर लगभग 6.5 फीसदी तक लाने की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के खत्म होने से पहले हिस्सेदारी बिक्री का पहला चरण लाया जा सकता है। इसी आशंका ने बाजार में शेयर पर दबाव बनाए रखा है।
निवेशकों की बढ़ती सतर्कता
सरकारी हिस्सेदारी बिक्री की खबरें सामने आते ही निवेशक आमतौर पर सतर्क हो जाते हैं। वजह साफ है कि बड़े स्तर पर शेयरों की सप्लाई आने की आशंका से कीमतों पर दबाव बन सकता है। LIC जैसे बड़े PSU शेयर में भी यही माहौल देखने को मिल रहा है। दिसंबर से जारी कमजोरी इस बात का संकेत है कि बाजार फिलहाल किसी भी पॉजिटिव ट्रिगर का इंतजार कर रहा है।
डेली चार्ट पर डेथ क्रॉस
बुधवार को LIC के शेयर के डेली चार्ट पर एक अहम टेक्निकल पैटर्न बना है, जिसे डेथ क्रॉस (Death Cross) कहा जाता है। डेथ क्रॉस तब बनता है, जब 50-दिन का मूविंग एवरेज यानी 50-DMA, गिरकर 200-दिन के मूविंग एवरेज यानी 200-DMA से नीचे चला जाता है। आमतौर पर इसे शेयर के लिए निगेटिव संकेत माना जाता है और यह आगे भी कमजोरी की चेतावनी देता है।
मूविंग एवरेज की स्थिति
LIC के डेली चार्ट के मुताबिक, फिलहाल 50-DMA ₹879.19 पर है, जबकि 200-DMA ₹880.33 पर मौजूद है। यानी छोटा मूविंग एवरेज अब लंबे मूविंग एवरेज से नीचे चला गया है। यह साफ तौर पर दिखाता है कि शॉर्ट टर्म ट्रेंड कमजोर हो चुका है और शेयर पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।
मौजूदा शेयर प्राइस
गुरुवार सुबह 10:29 बजे LIC का शेयर ₹844.30 पर कारोबार कर रहा था। यह करीब 0.90 फीसदी की गिरावट को दर्शाता है। दिन के कारोबार में शेयर का निचला स्तर ₹843.90 और ऊपरी स्तर ₹851.05 रहा। यह रेंज बताती है कि शेयर में फिलहाल तेज खरीदारी का माहौल नहीं है और निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
52-हफ्ते का हाई-लो
LIC के शेयर का 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹715.35 रहा है, जबकि ऊपरी स्तर ₹980.05 दर्ज किया गया है। मौजूदा भाव इन दोनों स्तरों के बीच है, लेकिन हाई से काफी नीचे बना हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि शेयर ने अपनी पिछली मजबूती काफी हद तक खो दी है।
छह महीने बाद बना संकेत
चार्ट से यह भी साफ होता है कि LIC के शेयर में छह महीने से ज्यादा समय बाद डेथ क्रॉस बना है। इससे पहले जून 2025 में शेयर में गोल्डन क्रॉस (Golden Cross) बना था, जब 50-DMA, 200-DMA के ऊपर चला गया था। उस समय इसे शेयर के लिए पॉजिटिव संकेत माना गया था, लेकिन मौजूदा डेथ क्रॉस ने उस मजबूती को कमजोर कर दिया है।
200-DMA के नीचे ट्रेडिंग
LIC का शेयर 8 दिसंबर 2025 से अपने लंबे समय के 200-DMA के नीचे कारोबार कर रहा है। 200-DMA को शेयर के लॉन्ग टर्म ट्रेंड का अहम संकेतक माना जाता है। आमतौर पर इसके ऊपर ट्रेड करना मजबूती का संकेत देता है, जबकि इसके नीचे रहना कमजोरी की तरफ इशारा करता है। LIC का लगातार 200-DMA से नीचे रहना निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत है।
सुपरट्रेंड का संकेत
डेली चार्ट पर LIC का शेयर 3 दिसंबर 2025 से सुपरट्रेंड (Supertrend) लाइन के नीचे बना हुआ है। यह दर्शाता है कि शॉर्ट टर्म में शेयर पर दबाव बना रह सकता है। सुपरट्रेंड इंडिकेटर को ट्रेडर्स शॉर्ट टर्म ट्रेंड पहचानने के लिए इस्तेमाल करते हैं और इसके नीचे रहना आमतौर पर कमजोरी का संकेत माना जाता है।
वीकली चार्ट की स्थिति
वीकली चार्ट की बात करें तो LIC का शेयर मई 2025 से अपने 50-हफ्ते के मूविंग एवरेज यानी 50-WMA के आसपास कारोबार कर रहा है। फिलहाल 50-WMA ₹862.16 पर है। इसका मतलब यह है कि शेयर ने इस लेवल को अभी तक निर्णायक रूप से नहीं तोड़ा है, लेकिन इसके ऊपर भी टिक नहीं पा रहा है।
लंबी अवधि का नजरिया
हालांकि, वीकली चार्ट यह भी दिखाता है कि मई 2025 में आए ब्रेकआउट के बाद से शेयर अब तक सुपरट्रेंड लाइन के ऊपर बना हुआ है। यह संकेत देता है कि मध्यम से लंबी अवधि में LIC के शेयर की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। वीकली सुपरट्रेंड लाइन इस समय करीब ₹815.15 पर है, जो एक अहम सपोर्ट लेवल माना जा सकता है।












