Lok Sabha Passes Pan Masala Cess Bill: राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए नया कानून मंजूर

लोकसभा ने Pan Masala Cess Bill को पास कर दिया है। अब पान मसाला पर लगने वाले उपकर का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत करने में किया

लोकसभा ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण वित्तीय विधेयक पारित किया, जिसके तहत पान मसाला पर उपकर लगाया जाएगा और इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए किया जाएगा। 

नई दिल्ली: लोकसभा ने पान मसाला पर उपकर लगाने वाले प्रावधानों वाले विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025' पर हुई चर्चा का जवाब दिया, जिसके बाद सदन ने विभिन्न संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से स्वीकृति दे दी। 

चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी वित्त मंत्री की जिम्मेदारी होती है कि राजस्व बढ़ाया जाए ताकि विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके, लेकिन इस सरकार ने कर के दायरे को घटाने की दिशा में काम किया है।

वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि किसी भी वित्त मंत्री की जिम्मेदारी होती है कि राजस्व संग्रह बढ़ाया जाए, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक खर्चे पूरे किए जा सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उपकर किसी नई व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि पहले से लागू क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा। सीतारमण ने सदन में कहा, “हम केवल हानिकारक वस्तुओं पर कर लगा रहे हैं। आम लोगों की बुनियादी जरूरतों पर यह कर लागू नहीं होगा। 

पान मसाला के उपभोग पर 40 प्रतिशत जीएसटी पहले से लागू है और यह बरकरार रहेगा। यह कर राष्ट्रीय सुरक्षा और सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाएगा।”

उपकर का उद्देश्य और उपयोग

'स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025' का मुख्य उद्देश्य है पान मसाला और अन्य हानिकारक वस्तुओं के निर्माण पर उपकर लगाकर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों के लिए धन जुटाना। यह विधेयक उन मशीनों और प्रक्रियाओं पर कर लागू करता है जिनके माध्यम से हानिकारक वस्तुएं तैयार की जाती हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि इससे राज्य सरकारों को मिलने वाला राजस्व भी साझा किया जाएगा। यह कदम राज्य और केंद्र के बीच वित्तीय सहयोग को सुनिश्चित करने के लिए अहम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधेयक का जीएसटी प्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे राज्य-केन्द्र के वित्तीय संतुलन को नुकसान नहीं होगा।

इतिहास और पृष्ठभूमि

जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, तब राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए पांच वर्षों के लिए क्षतिपूर्ति उपकर की व्यवस्था की गई थी। यह व्यवस्था 30 जून 2022 तक लागू थी और बाद में इसे चार साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2026 किया गया। इस दौरान संग्रहित उपकर का उपयोग कोविड महामारी के दौरान राज्यों के जीएसटी राजस्व हानि की भरपाई के लिए किया गया।

वित्त मंत्री ने सदन में यह भी उल्लेख किया कि 2014 से पहले चार उपकर का संग्रह होता था, और इसका कोई नया स्वरूप नहीं है। सीतारमण ने कहा कि राजस्व संग्रह कैग (CAG) की निगरानी में होता है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। उन्होंने यूपीए शासनकाल के दौरान रक्षा साजो-सामान की खरीद में हुई देरी का भी उल्लेख किया और कहा कि इस विधेयक से जुटाए गए संसाधनों का हिस्सा रक्षा क्षेत्र में भी जाएगा।

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