माधुरी दीक्षित का बड़ा बयान: ‘महिला केंद्रित’ फिल्मों का टैग क्यों? बदलते सिनेमा पर खुलकर बोलीं अभिनेत्री

माधुरी दीक्षित ने 'महिला केंद्रित' फिल्मों के टैग पर सवाल उठाते हुए बदलते सिनेमा और महिलाओं की भूमिकाओं पर खुलकर अपनी राय रखी। जानें अभिनेत्री ने क्या कहा।

Madhuri Dixit इन दिनों अपनी हालिया रिलीज फिल्म 'मां बहन' को लेकर चर्चा में हैं। एक विशेष बातचीत में उन्होंने अपने फिल्मी सफर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा था, तब कई लोगों ने उनके बारे में कहा था कि "ये लड़की नहीं चलेगी।"

एंटरटेनमेंट न्यूज़: भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने बदलते फिल्म उद्योग, महिला प्रधान फिल्मों और अपने तीन दशक लंबे करियर पर खुलकर बात की है। अपनी हालिया फिल्म ‘मां बहन’ को लेकर चर्चा में चल रहीं अभिनेत्री ने कहा कि वह हमेशा ऐसे किरदार चुनना चाहती हैं, जिन्हें पहले कभी न निभाया हो। 

साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी पुरुष अभिनेता की फिल्म आती है तो उसे अलग श्रेणी में नहीं रखा जाता, लेकिन महिला कलाकार के इर्द-गिर्द बनी फिल्मों को तुरंत ‘फीमेल सेंट्रिक’ कह दिया जाता है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में मनोरंजन उद्योग में महिलाओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व पर लगातार चर्चा हो रही है।

शुरुआती संघर्षों को किया याद

माधुरी दीक्षित ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के दौरान उन्हें कई तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उस समय लोग मानते थे कि वह पारंपरिक हिंदी फिल्म अभिनेत्रियों जैसी नहीं दिखतीं और इसलिए सफलता हासिल करना उनके लिए मुश्किल होगा।

अभिनेत्री ने बताया कि ऐसे समय में उनकी मां ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उनकी मां अक्सर कहती थीं कि जिन बातों के लिए आज लोग आलोचना कर रहे हैं, वही भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं। माधुरी के अनुसार, यह सीख उनके पूरे करियर में प्रेरणा का स्रोत बनी रही।

असुरक्षाओं से आत्मविश्वास तक का सफर

माधुरी ने स्वीकार किया कि करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने भी असुरक्षा की भावना का अनुभव किया था। उन्होंने कहा कि नए कलाकारों के मन में अक्सर संदेह पैदा किए जाते हैं, लेकिन परिवार का सहयोग उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता है। उन्होंने कहा कि आज वह खुद के साथ पूरी तरह सहज हैं और समय के साथ उन्होंने यह समझ लिया कि हर कलाकार की अपनी अलग पहचान होती है। उनका मानना है कि आत्मविश्वास और लगातार सीखने की इच्छा ही लंबे समय तक सफलता का आधार बनती है।

‘महिला केंद्रित’ फिल्मों पर उठाया सवाल

माधुरी दीक्षित का बड़ा बयान: ‘महिला केंद्रित’ फिल्मों का टैग क्यों? बदलते सिनेमा पर खुलकर बोलीं अभिनेत्री

हिंदी सिनेमा में महिलाओं की बदलती भूमिका पर बात करते हुए माधुरी दीक्षित ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज लेखकों और निर्देशकों की नई पीढ़ी ऐसी कहानियां लेकर आ रही है, जिनमें महिलाओं को केंद्र में रखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब किसी पुरुष अभिनेता की कहानी मुख्य होती है, तो उसे विशेष श्रेणी में नहीं रखा जाता, लेकिन जैसे ही महिला मुख्य किरदार बनती है, फिल्म को ‘महिला केंद्रित’ या ‘फीमेल सेंट्रिक’ कहा जाने लगता है। उनके अनुसार, किसी भी फिल्म की पहचान उसके विषय और कहानी से होनी चाहिए, न कि केवल इस आधार पर कि मुख्य भूमिका में महिला है या पुरुष।

खुद को दोहराने में नहीं रखती विश्वास

माधुरी दीक्षित ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की कोशिश की है। लोकप्रिय व्यावसायिक फिल्मों में सफलता मिलने के बावजूद उन्होंने गंभीर और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश हमेशा ऐसी भूमिकाएं निभाने की रहती है, जो पहले कभी न की हों। उनके मुताबिक, एक कलाकार के लिए लगातार खुद को चुनौती देना और नए प्रयोग करना जरूरी है। यही दृष्टिकोण उन्हें आज भी नए प्रोजेक्ट्स चुनने के लिए प्रेरित करता है।

बचपन का अनुभव बना फिल्म से जुड़ाव

अपनी नई फिल्म के सामाजिक पहलू पर चर्चा करते हुए माधुरी ने बचपन की एक याद साझा की। उन्होंने बताया कि उनके अपार्टमेंट में रहने वाली एक महिला को लोग उनके शांत स्वभाव और निजी जीवन के कारण अलग नजर से देखते थे। बच्चे भी उनके बारे में तरह-तरह की कल्पनाएं करते थे। माधुरी का मानना है कि समाज अक्सर उन लोगों के बारे में अपनी धारणाएं बना लेता है, जिन्हें वह ठीक से समझ नहीं पाता। उन्होंने कहा कि उनकी नई फिल्म भी इसी सोच को चुनौती देती है और लोगों को पूर्वाग्रहों से बाहर निकलने का संदेश देती है।

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