भारत सरकार ने मध्य पूर्व संकट की निगरानी के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया। पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 से 3 रुपये और डीजल पर 10 से 0 रुपये कर कटौती की गई, जिससे उपभोक्ताओं और तेल कंपनियों को राहत मिली।
New Delhi: भारत सरकार ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के प्रभाव की समीक्षा और निगरानी के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इस समूह की अध्यक्षता केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। सूत्रों के अनुसार इस समूह में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित अन्य मंत्री भी शामिल हैं। समूह का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व संकट के कारण उत्पन्न संभावित चुनौतियों और जोखिमों की समय पर जानकारी जुटाना और आवश्यक कदम उठाना है।
ईंधन कंपनियों और उपभोक्ताओं को राहत
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ा दिया है। इस पर सरकार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का ऐलान किया। वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च की देर रात जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की स्थिति
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम हाल ही में 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गए थे। इस उछाल का असर भारतीय तेल कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ा। हालांकि, भारत में तेल कंपनियों ने खुदरा दामों में वृद्धि नहीं की है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 100-105 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ती है, तो पेट्रोल पर 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।
सरकार की रणनीति और उत्पाद शुल्क में कटौती
सरकार ने इस स्थिति में उपभोक्ताओं और तेल कंपनियों दोनों को राहत देने का विकल्प चुना। उत्पाद शुल्क में कटौती से न केवल उपभोक्ताओं को लाभ होगा बल्कि तेल कंपनियों के आर्थिक दबाव को भी कम किया जा सकेगा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के शेयर बीएसई पर इस फैसले के बाद बढ़त के साथ खुले। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने भी कहा था कि अगर कच्चे तेल की कीमतें अधिक बढ़ती हैं, तो सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करके खुदरा बिक्री कीमतों को स्थिर रख सकती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। वहीं, प्राकृतिक गैस की आवश्यकता का करीब आधा हिस्सा देश में उपलब्ध नहीं है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उछाल और मध्य पूर्व संकट के कारण आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसलिए सरकार का यह कदम न केवल उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बल्कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।
अंतर-मंत्रालयी समूह की जिम्मेदारियां
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह का मुख्य कार्य मध्य पूर्व संघर्ष के प्रभाव की निरंतर निगरानी करना है। समूह संभावित संकटों का आकलन करेगा और समय पर रणनीतिक निर्णय लेने की सिफारिश करेगा। समूह में गृह, वित्त और पेट्रोलियम मंत्रालय के सदस्य शामिल होने से सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा संबंधित फैसलों को समन्वित तरीके से लिया जा सकेगा।
वैश्विक और घरेलू आर्थिक असर
मध्य पूर्व संकट का असर केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं बल्कि भारत के घरेलू बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। वैश्विक तेल की बढ़ती कीमतों से ईंधन कंपनियों के वित्तीय दबाव के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ गया था। सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती करके इस दबाव को कम किया और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार का रास्ता बनाया।
पेट्रोल और डीजल पर राहत
उत्पाद शुल्क में यह कटौती उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत है। पेट्रोल और डीजल पर टैक्स घटाने से आम जनता की दैनिक खर्च में कमी आएगी। विशेषकर, परिवहन और लॉजिस्टिक सेक्टर में लागत कम होने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। यह कदम आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और महंगाई पर काबू पाने की दिशा में सरकार की पहल को दर्शाता है।
तेल कंपनियों के लिए रणनीतिक समर्थन
सरकार की यह नीति तेल कंपनियों के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में वृद्धि के बावजूद खुदरा दामों को स्थिर बनाए रखने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती महत्वपूर्ण है। इससे कंपनियों के नुकसान को कम किया जा सकता है और उन्हें आर्थिक दबाव से राहत मिलती है। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों के लिए यह कदम वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में मददगार है।









