मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले, 6 मेडिकल कॉलेज और 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना मंजूर

मध्य प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला, 6 नए मेडिकल कॉलेज मंजूर कि ए , सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना और महिला-बाल योजनाओं को जारी रखने की मंजूरी दी।

मध्यप्रदेश कैबिनेट ने 6 नए मेडिकल कॉलेज, सागर में 286 करोड़ की सिंचाई परियोजना और सामाजिक योजनाओं को जारी रखने का फैसला लिया। साथ ही राज्य में दूध उत्पादन बढ़कर 12.44 लाख लीटर पहुंचने की जानकारी दी गई।

इंदौर: मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को भोपाल में हुई मंत्रिमंडल बैठक में स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। बैठक में छह नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव, सागर जिले के लिए 286 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजना, लोक निर्माण विभाग की चल रही परियोजनाओं को जारी रखने और सामाजिक कल्याण योजनाओं की निरंतरता जैसे बड़े निर्णय लिए गए।

इन फैसलों को राज्य के दीर्घकालिक विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक से पहले कहा कि राज्य सरकार विकास और सामाजिक न्याय दोनों मोर्चों पर संतुलित काम कर रही है।

छह जिलों में नए मेडिकल कॉलेज: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा विस्तार

मंत्रिमंडल ने राजगढ़, मंडला, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी और सिंगरौली जिलों में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि जिला स्तर पर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

मध्यप्रदेश के कई दूरस्थ और अर्ध-शहरी जिलों में अभी भी बेहतर इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। नए मेडिकल कॉलेज बनने से डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही, मेडिकल सीटों में वृद्धि से स्थानीय छात्रों को भी लाभ मिलेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य संस्थानों का विकेंद्रीकरण राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

सागर को 286 करोड़ की मिडवासा सिंचाई परियोजना

कैबिनेट ने सागर जिले के लिए 286 करोड़ रुपए की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी। इस परियोजना का उद्देश्य लगभग 7200 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, यह परियोजना क्षेत्र में जल प्रबंधन सुधारने, फसल उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में स्थिरता लाने में मदद करेगी। मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में मानसून पर अत्यधिक निर्भरता के कारण खेती जोखिम भरी रहती है। ऐसे में सिंचाई परियोजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

सागर और आसपास के इलाकों में इस परियोजना से हजारों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

दुग्ध उत्पादन में 25 प्रतिशत से अधिक वृद्धि

कैबिनेट बैठक में राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ने के आंकड़े भी साझा किए गए। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में दूध उत्पादन 9.4 लाख लीटर से बढ़कर 12.44 लाख लीटर तक पहुंच गया है। यह करीब 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है।

राज्य सरकार ने इसे पशुपालन, डेयरी प्रोत्साहन योजनाओं और ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों का सकारात्मक परिणाम बताया। दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी से न केवल किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी सेक्टर भारत के ग्रामीण आर्थिक ढांचे की रीढ़ है। मध्यप्रदेश में इस क्षेत्र में निवेश और सहकारी मॉडल के विस्तार से और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

कृषि यंत्रीकरण योजना जारी रहेगी

मंत्रिमंडल ने कृषि से जुड़ी मैकेनाइजेशन योजना को भी जारी रखने का फैसला किया। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण, मशीनें और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

सरकार का कहना है कि इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और श्रम दक्षता में सुधार करने में मदद मिल रही है। छोटे और मध्यम किसानों के लिए यह योजना विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते जलवायु पैटर्न और श्रम संकट के दौर में यंत्रीकरण भारतीय कृषि के लिए जरूरी हो गया है।

महिला सशक्तिकरण पर सरकार का विशेष जोर

बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह सप्ताह महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि राज्य में 25 अप्रैल तक नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा मनाया जाएगा।

इस दौरान प्रदेशभर में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन, पदयात्राएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में भी महिला अधिकारों और सामाजिक भागीदारी से जुड़े कार्यक्रम होंगे।

सरकार का कहना है कि महिला सशक्तिकरण को सामाजिक विकास के केंद्र में रखा गया है।

सामाजिक योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने कई प्रमुख सामाजिक योजनाओं को भी जारी रखने का फैसला किया। इनमें मध्यान्ह भोजन परिषद, मिशन शक्ति, संबल योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और हेल्पलाइन 181 शामिल हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं, बच्चों, श्रमिकों और कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा और संस्थागत सहायता प्रदान करना है। सरकार ने कहा कि इन कार्यक्रमों की निरंतरता से जमीनी स्तर पर लाभार्थियों को राहत मिलती रहेगी।

लोक निर्माण विभाग की परियोजनाएं जारी रहेंगी

कैबिनेट ने लोक निर्माण विभाग की चार चल रही परियोजनाओं को भी जारी रखने की मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं का लक्ष्य सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होती है। बुनियादी ढांचे में निवेश को राज्य के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार माना जा रहा है।

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