मेष संक्रांति 2026: कब मनाई जाएगी, जानें शुभ समय और महत्व

मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। जानें पुण्य काल, महापुण्य काल, सूर्य पूजा विधि और दान-स्नान का धार्मिक महत्व व लाभ की पूरी जानकारी।

मेष संक्रांति 2026 इस साल 14 अप्रैल को मनाई जाएगी, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। पुण्य और महापुण्य काल में स्नान, दान और सूर्य पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। बैसाखी के साथ इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

मेष संक्रांति 2026: इस साल मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा, जब सुबह 9:38 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यह घटना हिंदू पंचांग के अनुसार नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है और इसका सीधा संबंध सूर्य उपासना से है। यह पर्व भारत के कई हिस्सों में बैसाखी के साथ मनाया जाता है। पुण्य काल और महापुण्य काल में स्नान, दान और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे आरोग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

मेष संक्रांति 2026 की सही तारीख और खगोलीय समय

इस साल मेष संक्रांति का क्षण 14 अप्रैल की सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर होगा, जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ हिंदू पंचांग में नए सौर वर्ष की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन बैसाखी का पर्व भी मनाया जाता है, जिससे इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही एक नए ऊर्जा चक्र की शुरुआत मानी जाती है।

पुण्य काल और महापुण्य काल का समय

मेष संक्रांति के दिन पुण्य काल सुबह 5 बजकर 57 मिनट से दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में स्नान और दान को अत्यंत शुभ माना गया है। महापुण्य काल सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इस समय सूर्य पूजा और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति मानी जाती है।

मेष संक्रांति पूजा विधि और धार्मिक महत्व

मेष संक्रांति के दिन श्रद्धालु सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। अर्घ्य के जल में लाल फूल, चावल और कुमकुम मिलाना शुभ माना जाता है।

इस दौरान ॐ सूर्याय नमः और ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करने की परंपरा है। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और दान पुण्य करना विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता और परंपराएं

मान्यता है कि मेष संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह दिन सूर्य उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस दिन घरों में दीपक जलाने और जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र दान करने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति आती है।

Leave a comment