महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray) में अंदरूनी असंतोष की खबरों के बीच पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों के बगावती रुख अपनाने की चर्चा तेज हो गई है।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजरती नजर आ रही है। Shiv Sena (UBT) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और पार्टी में दूसरी बड़ी फूट की आशंका तेज हो गई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद जल्द ही अपने अलग राजनीतिक रुख का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि यह विभाजन औपचारिक रूप लेता है, तो इसका असर न केवल शिवसेना (यूबीटी) बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
बागी सांसदों की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सबकी नजर
सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट सांसद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपना पक्ष सार्वजनिक कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि वे लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को सौंपे गए पत्र और मुलाकात से जुड़े दस्तावेज भी सामने रख सकते हैं। इन सांसदों का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व अपने मूल राजनीतिक विचारों और संगठनात्मक दिशा से दूर चला गया है। वे अपने फैसले को वैचारिक असहमति से जोड़कर प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसद अपने कदम को वैचारिक आधार पर सही ठहराने में सफल रहते हैं, तो यह दलबदल विरोधी कानून से जुड़े संभावित विवादों को भी प्रभावित कर सकता है।
एकनाथ शिंदे से बढ़ सकती है नजदीकी
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राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि बागी सांसद औपचारिक घोषणा से पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख Eknath Shinde से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य की राजनीति में नए गठजोड़ और शक्ति संतुलन की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में भी शिवसेना में बड़ा विभाजन हुआ था, जिसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला धड़ा अलग हो गया था। वर्तमान घटनाक्रम को उसी राजनीतिक प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान
सूत्रों का कहना है कि असंतुष्ट सांसद पिछले कुछ समय से बेहद सावधानी के साथ अपने कदम उठा रहे हैं। उनका प्रयास रहा है कि वे किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचें, जिसे पार्टी छोड़ने की स्वैच्छिक घोषणा माना जा सके।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि हाल के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी कई नेताओं ने अपने राजनीतिक रुख को लेकर खुली घोषणा करने से परहेज किया। उनका उद्देश्य संभावित कानूनी चुनौतियों से बचना बताया जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने शुरू किया डैमेज कंट्रोल अभियान
संभावित विभाजन की खबरों के बीच Uddhav Thackeray ने संगठन को एकजुट बनाए रखने के लिए सक्रिय अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने उन क्षेत्रों का दौरा शुरू किया है जहां बागी सांसदों का प्रभाव माना जाता है। इस अभियान के तहत वे स्थानीय पदाधिकारियों, जिला प्रमुखों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।
यवतमाल, परभणी, हिंगोली, धाराशिव और शिरडी जैसे क्षेत्रों को इस अभियान में विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना और संभावित नुकसान को सीमित करना है।









