महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का नया बिल, जो धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन रोकने से संबंधित है, खास तौर पर महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए लाया गया है।
मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने सोमवार को राज्य सरकार के नए धोखे और दबाव से धर्म परिवर्तन रोकने वाले बिल का बचाव किया। सीएम ने कहा कि यह कानून खासकर महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में महिलाएं झूठे प्यार और शादी के बहाने फंसाई जाती हैं और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है, जिससे उनकी जिंदगी मुश्किल हो जाती है।
विपक्ष पर फडणवीस का निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष इस बिल को वोट बैंक की राजनीति के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उनका कहना था, “अगर विपक्ष इस बिल को ध्यान से पढ़ेगा तो उसमें किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कुछ भी नहीं दिखेगा। इसका उद्देश्य केवल जबरदस्ती, लालच या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।”
महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026

सरकार ने महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 शुक्रवार को विधानसभा में पेश किया। इस बिल के मुख्य प्रावधान हैं:
- जबरदस्ती, धोखे या शादी के बहाने धर्म परिवर्तन कराने पर कड़ी सजा।
- सामान्य अपराध में 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना।
यदि अपराध महिला, नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति-जनजाति के खिलाफ किया गया है, तो सजा और सख्त: 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना। धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी को सूचना देनी होगी।
अधिकारी इस सूचना को सार्वजनिक करेंगे और लोगों को 30 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति और समारोह आयोजित करने वाले को 21 दिन के भीतर प्रशासन को लिखित घोषणा करनी होगी। यदि कोई मानता है कि धर्म परिवर्तन गलत तरीके से कराया गया, तो माता-पिता, भाई-बहन या रिश्तेदार पुलिस में एफआईआर दर्ज कर सकते हैं।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया बिल
सीएम फडणवीस ने कहा कि कई बार महिलाएं किसी के साथ भागकर शादी कर लेती हैं, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है। इससे उनकी जीवन परिस्थितियां और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि यह बिल महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और राहत देने के उद्देश्य से लाया गया है।फडणवीस ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं है।
इससे पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी इसी तरह के कानून बनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बिल का मकसद धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धोखे और दबाव से होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।








