महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान विवाद: संजय राउत ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर साधा निशाना

Maharashtra में टीपू सुल्तान को लेकर जारी विवाद पर Sanjay Raut ने Bharatiya Janata Party और Indian National Congress दोनों पर निशाना साधा। जानें क्या है पूरा

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ऐतिहासिक शख्सियत टीपू सुल्तान को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ के ताजा संपादकीय में इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला गया है। 

मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत इन दिनों टीपू सुल्तान को लेकर गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के मुखपत्र ‘सामना’ ने इस विवाद पर भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर भी निशाना साधा है। विवाद की शुरुआत मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से हुई, जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। 

इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी, जिससे विवाद और गहरा गया है और राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामला मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने से शुरू हुआ। तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। विरोध के बाद तस्वीर हटा दी गई, लेकिन विवाद थमने के बजाय और बढ़ गया। इसी बीच महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया। इस बयान के बाद उनके खिलाफ पुणे में मामला भी दर्ज किया गया।

‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में लिखा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह टीपू सुल्तान को भी “कब्र से बाहर निकालकर” राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। लेख में कहा गया कि इतिहास की बहस को वर्तमान राजनीति का हथियार बनाया जा रहा है। संपादकीय में बीजेपी पर आरोप लगाया गया कि उसने इस विवाद को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की। 

वहीं कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि टीपू सुल्तान की तुलना शिवाजी महाराज से करना असंगत और अनुचित है। लेख में शिवाजी महाराज के ‘हिंदवी स्वराज’ की स्थापना को अद्वितीय बताते हुए कहा गया कि उनकी तुलना किसी अन्य ऐतिहासिक शासक से नहीं की जा सकती।

बीजेपी की प्रतिक्रिया और पलटवार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस के बयान की कड़ी आलोचना की। बीजेपी नेताओं ने टीपू सुल्तान को लेकर कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाए और इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताया। हालांकि, ‘सामना’ ने संपादकीय में बीजेपी से भी सवाल किया कि यदि टीपू सुल्तान को लेकर इतना आक्रोश है, तो पाकिस्तान के साथ होने वाले क्रिकेट मैचों पर चुप्पी क्यों साधी जाती है? लेख में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उनके बेटे जय शाह का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबले आयोजित होते हैं, तब वैसा विरोध क्यों नहीं दिखता।

संपादकीय में यह भी पूछा गया कि अगर टीपू सुल्तान को पाकिस्तान में ‘नायक’ माना जाता है, तो फिर पाकिस्तान के साथ खेल संबंधों पर वैसी ही तीखी प्रतिक्रिया क्यों नहीं आती?

इतिहास बनाम वर्तमान राजनीति

लेख में टीपू सुल्तान के ऐतिहासिक संदर्भ का भी जिक्र किया गया। टीपू सुल्तान 18वीं सदी में मैसूर के शासक थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई युद्ध लड़े। 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम की लड़ाई में उनकी मृत्यु हुई। कुछ इतिहासकार उन्हें औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष करने वाले शुरुआती योद्धाओं में गिनते हैं। हालांकि, उन पर हिंदुओं के जबरन धर्मांतरण और अत्याचार के आरोप भी इतिहास में दर्ज हैं, जिससे उनका व्यक्तित्व विवादास्पद बना रहता है। यही कारण है कि उनका नाम अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बन जाता है।

यह विवाद केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक रणनीतियों और विचारधारात्मक संघर्ष को भी उजागर करता है। ‘सामना’ ने जहां कांग्रेस की तुलना को अनुचित बताया, वहीं बीजेपी पर भी चयनात्मक आक्रोश का आरोप लगाया।

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