महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने इस बार सभी का ध्यान खींचा है। एआईएमआईएम ने राज्य भर में 126 सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रभाव दिखाया है।
मुंबई: महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इन चुनावों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 126 सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत उपस्थिति का संकेत दिया है। पार्टी की यह सफलता केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले एक अहम राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
खासतौर पर छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) में AIMIM की शानदार जीत ने सभी दलों का ध्यान खींचा है। यहां पार्टी ने 33 सीटों पर कब्जा जमाया, जो उसकी अब तक की सबसे बड़ी शहरी सफलता मानी जा रही है।
ओवैसी की सक्रियता बनी जीत की बड़ी वजह
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस जीत के पीछे पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सक्रिय भूमिका एक प्रमुख कारण रही। इस बार ओवैसी ने चुनाव प्रचार में पहले से कहीं ज्यादा समय दिया। उन्होंने न सिर्फ बड़ी रैलियां कीं, बल्कि छोटे इलाकों में जाकर स्थानीय मुद्दों पर लोगों से सीधे संवाद भी किया। पार्टी रणनीति का फोकस बड़े भाषणों के बजाय घर-घर संपर्क, मोहल्ला बैठकों और नगर निकाय से जुड़ी समस्याओं पर रहा। सड़क, पानी, सफाई, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर प्रचार किया गया, जिससे शहरी मतदाताओं से सीधा जुड़ाव बना।
किन शहरों में AIMIM को कितनी सीटें मिलीं?
AIMIM की जीत का दायरा सिर्फ एक या दो शहरों तक सीमित नहीं रहा। पार्टी को कई अहम शहरी क्षेत्रों में सफलता मिली:
- छत्रपति संभाजीनगर: 33 सीटें
- मालेगांव: 21 सीटें
- नांदेड़: 14 सीटें
- अमरावती: 12 सीटें
- धुले: 10 सीटें
- सोलापुर: 8 सीटें
- मुंबई: 8 सीटें
- नागपुर: 6 सीटें
- ठाणे: 5 सीटें
- अकोला: 3 सीटें
- अहिल्यनगर और जलना: 2-2 सीटें
- चंद्रपुर: 1 सीट
इन नतीजों से साफ है कि AIMIM अब सिर्फ सीमित क्षेत्रों की पार्टी नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्यव्यापी शहरी राजनीति में अपनी जगह मजबूत कर रही है।

चुनावी रणनीति में क्या रहा खास?
AIMIM की इस सफलता के पीछे एक सुनियोजित रणनीति दिखाई देती है:
- टिकट वितरण को लेकर शुरुआती असंतोष को बातचीत से सुलझाया गया
- नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं में से करीब 70% को फिर से पार्टी से जोड़ा गया
- प्रभावशाली इलाकों में ओवैसी की मौजूदगी ने माहौल बदला
- छोटे कार्यक्रमों में स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता दी गई
- विपक्षी दलों की आपसी खींचतान का चुनावी फायदा उठाया गया
- पिछली हार से मिली सीख बनी ताकत
पार्टी नेताओं का कहना है कि 2024 विधानसभा चुनाव में औरंगाबाद पूर्व से इम्तियाज जलील की बेहद करीबी हार ने कार्यकर्ताओं को गहरा झटका दिया था। यही निराशा इस बार प्रेरणा में बदल गई। कार्यकर्ताओं ने अधिक संगठित होकर जमीनी स्तर पर काम किया और मतदाताओं से सीधा संपर्क बढ़ाया।











