S. Jaishankar ने कहा है कि भारत भी United Nations के समुद्री और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता है। उन्होंने बताया कि ईरानी की तरफ से एक जहाज के गलत जगह फंसने की सूचना मिली थी।
नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के समुद्री और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थन करता है। यह बयान श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना के बाद आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने सभी कानूनी और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए स्थिति को संभाला।
ईरानी युद्धपोत की घटना पर भारत का रुख
रायसीना डायलॉग में शनिवार को बोलते हुए जयशंकर ने बताया, “हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनका एक जहाज हमारी सीमा के पास फंसा हुआ था और उसे मदद की जरूरत थी। उन्होंने संकेत दिया कि जहाज हमारे बंदरगाह पर आना चाहता था और कुछ समस्याओं का सामना कर रहा था। हमने स्थिति को ध्यान से देखा और उन्हें कोच्चि में रुकने की अनुमति दी। इसके बाद हालात सामान्य हो गए।”
जयशंकर ने यह भी कहा कि ईरानी जहाज फ्लीट रिव्यू के लिए आया था, लेकिन गलत दिशा में फंस गया। उन्होंने सिचुएशन को कानूनी और मानवीय दोनों दृष्टिकोण से देखा। “हिंद महासागर में अलग-अलग देशों के जहाजों के संचालन की स्थिति को समझना जरूरी है। श्रीलंका में भी इसी तरह की स्थिति हुई थी, और उनका फैसला उनके लिए अनुकूल नहीं रहा। हमने सही कदम उठाया,” जयशंकर ने कहा।

हिंद महासागर की असलियत
विदेश मंत्री ने हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व और जटिलताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हिंद महासागर का इकोसिस्टम बहुत संवेदनशील है। पिछले पांच दशकों से यह क्षेत्र रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। जिबूती जैसे स्थानों पर विदेशी सेनाओं की उपस्थिति भी इस क्षेत्र के महत्व को दिखाती है।
जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर के रीबिल्डिंग और रिकवरी प्रोसेस में भारत ने पिछले दशक में बड़ी निवेश और कूटनीतिक पहल की है। उन्होंने जोर दिया कि व्यापार और कनेक्टिविटी को बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
भारत की रणनीति और विकास
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी पहचान और प्रभाव खुद तय करेगा। उन्होंने कहा, “अगर हमें हिंद महासागर की भावना और पहचान बनानी है, तो इसे संसाधन, प्रतिबद्धता और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स से सपोर्ट करना होगा। हमारा विकास खुद तय करेगा कि किसे लाभ होगा और किसे नहीं। हम दूसरों की गलतियों से नहीं, बल्कि अपनी ताकत और क्षमता से आगे बढ़ेंगे।
जयशंकर ने हिंद महासागर को लेकर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा, “यह महासागर विशेष है क्योंकि इसका नाम किसी देश के नाम पर नहीं रखा गया। हम इसके ठीक बीच में हैं, और हमारी रणनीति से क्षेत्र के अन्य देशों को भी लाभ मिलेगा। जयशंकर के अनुसार भारत ने हमेशा समुद्री कानूनों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन किया है। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद या घटना में मानवीय दृष्टिकोण, सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।












