वैज्ञानिकों ने बनाया Brain-IT AI, Brain Scan से देखी गई तस्वीरों को कर सकता है Recreate

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इजरायली वैज्ञानिकों ने Brain-IT नाम का AI सिस्टम विकसित किया है, जो fMRI brain data के आधार पर व्यक्ति द्वारा देखी गई तस्वीरों को reconstruct करता है। Researchers इसे communication और neuroscience research में उपयोगी मान रहे हैं।

Tech: Weizmann Institute of Science के researchers ने Brain-IT AI सिस्टम तैयार किया है, जो fMRI से रिकॉर्ड हुई brain activity का analysis करके किसी व्यक्ति द्वारा देखी गई image को दोबारा तैयार कर सकता है। Research में आठ लोगों के 70,000 से ज्यादा images देखने से जुड़े records का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह technology भविष्य में बोलने या movement की क्षमता खो चुके मरीजों के लिए assistive communication में उपयोगी हो सकती है।

Brain Scan से तस्वीरों को दोबारा तैयार करता है AI

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। इसे Brain-IT नाम दिया गया है। यह सिस्टम fMRI यानी फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग से मिलने वाले ब्रेन एक्टिविटी डेटा का विश्लेषण करता है और व्यक्ति द्वारा देखी गई तस्वीर को दोबारा तैयार करने की कोशिश करता है।

इस तकनीक को इजरायल के Weizmann Institute of Science के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। सिस्टम का उद्देश्य ब्रेन में किसी तस्वीर को देखने के दौरान बनने वाले संकेतों और उस तस्वीर की दृश्य जानकारी के बीच संबंध को समझना है।

हालांकि, इसे सीधे तौर पर इंसान के हर विचार को पढ़ने वाली तकनीक समझना सही नहीं होगा। यह मुख्य रूप से ब्रेन में दर्ज दृश्य गतिविधियों को समझकर उस तस्वीर का पुनर्निर्माण करता है, जिसे व्यक्ति ने देखा है।

70 हजार से ज्यादा तस्वीरों के डेटा से हुई ट्रेनिंग

इस AI सिस्टम को तैयार करने के लिए आठ लोगों के ब्रेन डेटा का इस्तेमाल किया गया। इन प्रतिभागियों ने fMRI स्कैन के दौरान 70 हजार से अधिक तस्वीरें देखीं। इन तस्वीरों को देखने के दौरान उनके ब्रेन में होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया।

वैज्ञानिकों ने इस डेटा की मदद से AI मॉडल को यह समझाने की कोशिश की कि अलग-अलग तस्वीरों को देखने पर ब्रेन के कौन से हिस्से किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं। शोध के दौरान ब्रेन के 128 अलग-अलग क्षेत्रों में गतिविधियों का अध्ययन किया गया।

इनमें कुछ हिस्से खाने, खेल और घर या बाहर के दृश्यों जैसी अलग-अलग दृश्य श्रेणियों से जुड़े संकेत दिखाते हैं। AI मॉडल ने इन संकेतों को तस्वीरों की जानकारी से जोड़कर उनके संभावित पुनर्निर्माण की कोशिश की।

भविष्य में मरीजों के लिए हो सकती है मददगार

Brain-IT जैसी तकनीक का संभावित इस्तेमाल केवल तस्वीरों को दोबारा बनाने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में ब्रेन-डिकोडिंग तकनीक ऐसे मरीजों के लिए संचार का माध्यम बन सकती है, जो बोलने या शरीर को हिलाने में असमर्थ हैं।

उदाहरण के लिए, गंभीर पैरालिसिस से प्रभावित व्यक्ति अगर अपनी बात बोलकर या हाथ-पैर के जरिए नहीं बता सकता, तो भविष्य में ऐसी तकनीक ब्रेन एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी समझने में मदद कर सकती है।

हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती शोध स्तर पर है। इसके लिए fMRI जैसी विशेष मशीनों की जरूरत होती है और मौजूदा अध्ययन में प्रतिभागियों की संख्या भी सीमित थी। इसलिए बड़े और अलग-अलग समूहों पर आगे के परीक्षण जरूरी होंगे।

फिलहाल इस शोध को AI और न्यूरोसाइंस के बीच बढ़ते तालमेल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। आने वाले समय में ऐसी तकनीकें ब्रेन एक्टिविटी को समझने और उससे जुड़ी जानकारी को उपयोगी रूप में बदलने के नए रास्ते खोल सकती हैं।

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