महाराष्ट्र के सोलापुर में मजदूरों को बंधक बनाकर गन्ना कटाई कराई जा रही थी। मारपीट और धमकियों से डराया गया। राजस्थान पुलिस ने 53 मजदूरों को सुरक्षित छुड़ाया, तीन आरोपियों पर केस दर्ज हुआ।
Rajasthan: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के कई गांवों से मजदूरों को इंदौर में गन्ना कटाई का काम दिलाने का झांसा दिया गया। मजदूरों को बताया गया कि काम खत्म होने के बाद रोजाना 500 रुपए मजदूरी मिलेगी। भरोसा करके मजदूर तैयार हो गए, लेकिन टेम्पो में बैठते ही उनकी किस्मत बदल गई। उन्हें इंदौर नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अकलूज क्षेत्र के जाबुड़ गांव ले जाया गया। वहां पहुंचते ही मजदूरों को गन्ने के खेतों में जबरन काम पर लगा दिया गया।
मजदूरों के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें यह एहसास ही नहीं हुआ कि वे बंधक बना लिए गए हैं। जब दो दिन तक मजदूरी नहीं मिली और उन्होंने पैसे मांगे, तो जमींदार के लोगों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। यहीं से मजदूरों को समझ आ गया कि वे एक खतरनाक जाल में फंस चुके हैं।
भागने पर मिलती थी सजा
मजदूरों ने बताया कि उनसे सुबह 4 बजे से लेकर रात 12 बजे तक काम कराया जाता था। न कोई तय समय था और न ही आराम। जो बीमार पड़ जाता, उसे भी जबरन खेतों में ले जाया जाता। इलाज की कोई व्यवस्था नहीं थी। अगर किसी मजदूर के घर में कोई बीमार हो जाता और वह घर जाने की बात करता, तो उसे एक कमरे में बंद कर दिया जाता।
भागने की कोशिश करने वालों पर खास निगरानी रखी जाती थी। मजदूरों के अनुसार, 14–15 लोग लाठी-डंडे लेकर पहरा देते थे। कई मजदूरों को पांच-पांच दिन तक कमरे में बंद रखा गया। डर का माहौल ऐसा था कि उन्हें खुलेआम धमकी दी जाती थी, ‘अगर कोई मर भी गया, तो यहीं गड्ढा खोदकर दफना देंगे।‘
धमकी और जबरन वसूली
गांव कुंवारी और चिकली के मजदूरों ने बताया कि जो लोग किसी तरह भागने में सफल हो गए, उनकी सजा बाकी मजदूरों को दी जाती थी। जमींदार के लोग भागे हुए मजदूरों की रकम उनके साथियों से वसूलते थे। रकम देने से इनकार करने पर बेरहमी से पिटाई की जाती थी।
चिकली गांव के महिपाल ने बताया कि उसके भाई समेत कई मजदूर पहले ही दिन मौका पाकर भाग गए थे। इसके बाद जमींदार के लोगों ने महिपाल पर दबाव बनाया और कहा कि भागे हुए मजदूरों के पैसे वही देगा। मारपीट से तंग आकर उसने अपने पिता को फोन किया। पिता ने जमीन बेचकर 55 हजार रुपए की व्यवस्था की, तब जाकर उसे छोड़ा गया। महिपाल ने मारपीट का एक वीडियो भी पुलिस और मीडिया को सौंपा, जिसमें मजदूरों को गन्ने के खेत में पीटा जाता दिख रहा है।
950 किलोमीटर दूर जाकर पुलिस ने किया रेस्क्यू
प्रतापगढ़ के एसपी बी. आदित्य ने बताया कि 22 दिसंबर को घंटाली थाने में मजदूर के परिजन ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में मजदूरों को बंधक बनाकर काम कराने की बात कही गई थी। इसके बाद घंटाली थानाधिकारी सोहनलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम मजदूरों के परिजनों के साथ महाराष्ट्र पहुंची।
पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर 53 मजदूरों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इस मामले में राजस्थान के घंटाली निवासी बंशीलाल, महाराष्ट्र के सीताराम पाटिल और अलवर के खान नामक व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बंधुआ मजदूरी की गंभीर सच्चाई को उजागर करती है, जहां गरीब और मजबूर लोगों को रोजगार का सपना दिखाकर अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है।










