कांग्रेस ने मनरेगा में बदलाव के खिलाफ केंद्र सरकार के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान किया है। मनरेगा बचाओ संग्राम 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा, जिसमें पंचायत से विधानसभा स्तर तक प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी।
New Delhi: कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा (MNREGA) को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान किया है। पार्टी ने इस अभियान को मनरेगा बचाओ संग्राम नाम दिया है, जो 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। बिहार में यह आंदोलन कुल 47 दिनों तक अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि यह संघर्ष ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और काम के अधिकार की रक्षा के लिए जरूरी हो गया है।
केंद्र सरकार की नीतियों पर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार की मौजूदा नीतियों के कारण मनरेगा का मूल उद्देश्य कमजोर पड़ रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बजट में कटौती, मजदूरी दरों में अपेक्षित बढ़ोतरी न होना और काम के दिनों में कमी से करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। कांग्रेस इसे केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की जीवन रेखा मानती है। इसी वजह से पार्टी ने इस मुद्दे को सड़क से संसद तक उठाने का फैसला किया है।
राष्ट्रव्यापी अभियान की तैयारी
कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मनरेगा बचाओ संग्राम की तैयारी 8 जनवरी से शुरू होगी। इस दिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी PCC स्तर पर बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में आंदोलन की पूरी रणनीति, जिम्मेदारियां और कार्यक्रम तय किए जाएंगे। पार्टी का उद्देश्य है कि हर स्तर पर कार्यकर्ता इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाएं और मनरेगा से जुड़े मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाएं।
10 जनवरी से आंदोलन की औपचारिक शुरुआत
अभियान की औपचारिक शुरुआत 10 जनवरी को होगी। इस दिन बिहार सहित देशभर के सभी जिलों में जिला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी। इन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगी और मनरेगा में कथित बदलावों से होने वाले नुकसान को जनता के सामने रखेगी। पार्टी का कहना है कि मीडिया के माध्यम से ग्रामीण मजदूरों की आवाज को व्यापक मंच देना इस अभियान का अहम हिस्सा है।
उपवास से प्रतीकात्मक विरोध

11 जनवरी को कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता एक दिन का उपवास रखेंगे। यह उपवास प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना जरूरी है। उपवास के जरिए यह संदेश देने की कोशिश होगी कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा है।
पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान
12 जनवरी से 29 जनवरी तक आंदोलन का सबसे अहम चरण शुरू होगा। इस दौरान पंचायत स्तर पर व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता हर ग्राम पंचायत में चौपालें लगाएंगे, जहां ग्रामीणों के साथ सीधे संवाद किया जाएगा। इन चौपालों में मनरेगा से जुड़े मुद्दों, मजदूरी भुगतान, काम की उपलब्धता और सरकारी प्रक्रियाओं पर खुलकर चर्चा होगी। पार्टी का दावा है कि इससे ग्रामीण जनता को अपनी समस्याएं साझा करने का मंच मिलेगा।
नुक्कड़ सभाएं और जागरूकता अभियान
इसी अवधि में विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन सभाओं के जरिए आम जनता को मनरेगा में हो रहे बदलावों और उनके संभावित प्रभावों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही पैम्फलेट वितरण के माध्यम से जानकारी दी जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुद्दे से जुड़ सकें। कांग्रेस का मानना है कि जब तक लोगों को सही जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक बड़े जनआंदोलन की नींव मजबूत नहीं होगी।
धरना प्रदर्शन का अगला चरण
30 जनवरी को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिलों में मनरेगा बचाओ धरना दिया जाएगा। इन धरनों के माध्यम से कांग्रेस केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह धरना केवल विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों की पीड़ा को सामने लाने का माध्यम होगा।
विधानसभा घेराव की तैयारी
आंदोलन के अगले चरण में कांग्रेस ने विधानसभा घेराव का बड़ा प्लान तैयार किया है। 7 फरवरी से 15 फरवरी तक राज्य स्तर पर विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और मनरेगा श्रमिक शामिल होंगे। पार्टी का कहना है कि विधानसभा घेराव के जरिए सरकार को यह एहसास कराया जाएगा कि मनरेगा से जुड़े फैसले केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा असर जमीन पर पड़ता है।
अंतिम चरण में अखिल भारतीय रैलियां
आंदोलन का अंतिम चरण 16 फरवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान आंचलिक स्तर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में मनरेगा बचाओ रैलियां आयोजित की जाएंगी। इन रैलियों में राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल होंगे और मनरेगा को लेकर कांग्रेस की मांगों को मजबूती से रखा जाएगा। पार्टी का दावा है कि यह चरण आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान देगा।










