मुंबई में 6 अगस्त 2026 को Gen Z और जेन-अल्फा के साथ हुए एक संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय रखी।
Gen Z Convention: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने 6 अगस्त 2026 को मुंबई में जेनरेशन Z और जेनरेशन अल्फा के साथ हुए एक संवाद कार्यक्रम में कई संवेदनशील सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। उनके बयान आरक्षण, जनसंख्या नीति, मुस्लिम समुदाय और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर चर्चा का विषय बन गए हैं।
भागवत के इन बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों और सामाजिक संगठनों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे संघ के रुख में बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह RSS की पुरानी विचारधारा को नए संदर्भ में पेश करने की कोशिश है।
आरक्षण पर भागवत का रुख: भेदभाव खत्म होने तक जारी रहे व्यवस्था
आरक्षण के मुद्दे पर मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में सामाजिक भेदभाव मौजूद है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का आधार सामाजिक असमानता को दूर करना है और इसे राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। भागवत ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण को ईमानदारी से लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके हैं, वे स्वेच्छा से दूसरों के लिए अवसर छोड़ने पर विचार कर सकते हैं। RSS प्रमुख ने राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण को कई बार राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे समाज में तनाव बढ़ा।
उन्होंने पहले भी आरक्षण को लेकर इसी तरह का रुख अपनाया है। भागवत ने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो लंबे समय तक आरक्षण जारी रखा जा सकता है, जब तक समाज में वास्तविक समानता स्थापित नहीं हो जाती।
जनसंख्या नीति पर तीन बच्चों की चर्चा

जनसंख्या के मुद्दे पर भागवत ने परिवारों में तीन बच्चों के विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि घटती जन्म दर लंबे समय में सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। उन्होंने जनसंख्या नीति की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को आने वाले 50 वर्षों में जनसंख्या, स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर इसके प्रभाव का अध्ययन करना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाया जाना चाहिए। पहले समाज में जागरूकता और समझ विकसित करना जरूरी है। भागवत ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी चिंता जताई और कहा कि देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए।
मुस्लिम समुदाय को लेकर बोले- सभी को एक नजर से न देखें
मुस्लिम समुदाय को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि सभी मुसलमानों को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय के सभी लोगों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अच्छे और गलत विचार रखने वाले लोगों के बीच अंतर करना जरूरी है। भागवत ने धार्मिक आधार पर भेदभाव से बचने की बात कही और कहा कि सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलने चाहिए।
हालांकि, उन्होंने RSS की सदस्यता को लेकर अपनी पुरानी स्थिति भी दोहराई। उन्होंने कहा कि संगठन की सदस्यता हिंदू पहचान के आधार पर है। उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई।
पाकिस्तान के साथ संबंधों पर बातचीत का समर्थन
पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर भागवत ने कहा कि स्थायी दुश्मनी किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थिति में सरकार और सेना के साथ खड़ा होना जरूरी है, लेकिन बातचीत के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।
भागवत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के आम लोगों को हमेशा दुश्मन के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने अपने बयान में कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करते हुए संवाद की संभावनाओं को खत्म नहीं करना चाहिए।
चार मुद्दों पर नई राजनीतिक बहस
मोहन भागवत के हालिया बयानों ने भारतीय राजनीति और समाज में एक नई बहस शुरू कर दी है। आरक्षण पर उनका सामाजिक समानता वाला दृष्टिकोण, जनसंख्या पर तीन बच्चों की चर्चा, मुस्लिम समुदाय को लेकर संतुलित लेकिन सतर्क रुख और पाकिस्तान के साथ संवाद की बात—इन सभी मुद्दों ने व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भागवत के बयान RSS की विचारधारा, बदलते सामाजिक माहौल और देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं।











