राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर पवन कल्याण का संदेश, बोले- हथकरघा अपनाकर बुनकरों और भारतीय विरासत को करें मजबूत

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने बुनकरों को शुभकामनाएं दीं। उत्पाद अपनाने, संस्कृति बचाने और बुनक को सशक्त बनाने की अपील की।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने बुनकरों और कारीगरों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से हथकरघा उत्पाद अपनाने, भारतीय विरासत को संरक्षित करने और बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की अपील की।

अमरावती: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने राज्य और देशभर के हथकरघा बुनकरों तथा कारीगरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा केवल वस्त्र निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और शिल्प कौशल का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक हथकरघा उत्पादों का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने से न केवल देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि लाखों बुनकर परिवारों को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।

हथकरघा भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक

पवन कल्याण ने कहा कि हर हथकरघा उत्पाद अपने साथ भारत की विविध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय शिल्प की कहानी लेकर चलता है। उनके अनुसार, हथकरघा केवल कपड़ा नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कला और कौशल का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग दैनिक जीवन में अधिक से अधिक हथकरघा उत्पादों को अपनाते हैं, तो इससे पारंपरिक उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

बुनकरों को सशक्त बनाने की अपील

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा उद्योग से जुड़े लाखों परिवार अपनी मेहनत और कौशल के बल पर देश की पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में समाज की जिम्मेदारी है कि वह उनके उत्पादों को प्राथमिकता देकर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दे। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से आत्मनिर्भरता, रोजगार और पारंपरिक उद्योगों का संरक्षण एक साथ संभव हो सकता है।

खुद को बताया हथकरघा का ब्रांड एंबेसडर

पवन कल्याण ने कहा कि उन्हें हथकरघा का ब्रांड एंबेसडर बनने पर गर्व है। उन्होंने इसे केवल सम्मान नहीं बल्कि जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार, हथकरघा उद्योग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और बुनकरों की समस्याओं को सामने लाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र को नई पहचान मिल सकती है।

जन सेना पार्टी में बुनकरों के लिए अलग विभाग

पवन कल्याण ने बताया कि उनकी पार्टी जन सेना ने बुनकरों के विकास और कल्याण के लिए एक अलग विभाग बनाया है। इसका उद्देश्य हथकरघा समुदाय की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि पार्टी लंबे समय से बुनकरों के हितों की आवाज उठाती रही है और भविष्य में भी उनके कल्याण के लिए कार्य करती रहेगी।

सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की एनडीए सरकार हथकरघा बुनकरों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से "नेतन्ना सेवा" (Netanna Sevalo) योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके तहत पात्र बुनकरों को मुफ्त बिजली और 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि हथकरघा उद्योग को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाना भी है।

भारतीय हथकरघा विरासत के संरक्षण पर जोर

पवन कल्याण ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। इस विरासत को सुरक्षित रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में पारंपरिक शिल्प को नई तकनीक, बेहतर विपणन और युवाओं की भागीदारी से जोड़ना आवश्यक है, ताकि यह उद्योग भविष्य में भी प्रतिस्पर्धी बना रहे।

प्रधानमंत्री के संदेश का किया उल्लेख

उपमुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी विशेष वीडियो संदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों, विशेष रूप से युवाओं और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स से हथकरघा वस्त्रों को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि युवा हथकरघा परिधान पहनकर सोशल मीडिया पर रचनात्मक सामग्री साझा करते हैं, तो इससे पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच भी बढ़ेगी।

सोशल मीडिया के माध्यम से भी की अपील

पवन कल्याण ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर भी एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने लोगों से भारतीय हथकरघा विरासत को संरक्षित करने और बुनकरों का समर्थन करने का आग्रह किया। उन्होंने लिखा कि देश के पारंपरिक शिल्पकार और बुनकर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनके उत्पादों को अपनाना और उन्हें प्रोत्साहित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

हथकरघा उद्योग का आर्थिक महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का हथकरघा क्षेत्र कृषि के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है। लाखों बुनकर और कारीगर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं और देश के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक वस्त्रों का निर्माण करते हैं। यह उद्योग न केवल घरेलू बाजार की मांग पूरी करता है, बल्कि भारतीय हस्तनिर्मित वस्त्रों का निर्यात भी करता है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिलती है।

परंपरा और आधुनिकता का संतुलन जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि हथकरघा उद्योग के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए पारंपरिक शिल्प और आधुनिक बाजार की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, फैशन उद्योग और सोशल मीडिया के माध्यम से हथकरघा उत्पादों को नई पहचान मिल सकती है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पवन कल्याण का संदेश इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका मानना है कि यदि सरकार, उद्योग, डिजाइनर, युवा और आम नागरिक मिलकर हथकरघा उत्पादों को अपनाएं, तो इससे न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी बल्कि लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका भी अधिक सशक्त और स्थायी बन सकेगी।

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