वैज्ञानिकों ने खोजीं ‘मोटिवेशन’ बढ़ाने वाली ब्रेन सेल्स, डिप्रेशन और ADHD के इलाज में मिल सकती है नई दिशा

जापानी वैज्ञानिकों ने प्रेरणा बढ़ाने वाली Orexin ब्रेन सेल्स की पहचान की है। यह खोज डिप्रेशन, ADHD और नशे की लत के इलाज में नई संभावनाएं खोल सकती है।

जापान के वैज्ञानिकों ने ऐसी ब्रेन सेल्स की पहचान की है जो इनाम की उम्मीद को लगातार प्रयास करने की प्रेरणा से जोड़ती हैं। यह खोज डिप्रेशन, ADHD और नशे की लत जैसे मानसिक विकारों के इलाज में नई संभावनाएं खोल सकती है।

जापान: Motivation Brain Cells पर हुई एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क की ऐसी कोशिकाओं की पहचान की है जो कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज डिप्रेशन, ADHD और एडिक्शन जैसी मानसिक समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने और उनके उपचार के नए रास्ते खोल सकती है।

प्रेरणा बनाए रखने में Orexin न्यूरॉन्स की अहम भूमिका

जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अपने नए अध्ययन में पाया कि ओरेक्सिन (Orexin) न्यूरॉन्स केवल नींद, भूख और ऊर्जा संतुलन को नियंत्रित नहीं करते, बल्कि व्यक्ति को लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करते रहने की प्रेरणा भी देते हैं।

यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये न्यूरॉन्स इनाम मिलने की उम्मीद को मेहनत जारी रखने की इच्छा से जोड़ते हैं, जिससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास करना नहीं छोड़ता।

डिप्रेशन और ADHD को समझने में मिलेगी मदद

वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रेरणा की कमी डिप्रेशन, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और नशे की लत जैसी कई मानसिक बीमारियों का प्रमुख लक्षण होती है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि मस्तिष्क में कौन-सी प्रणाली इस प्रक्रिया को नियंत्रित करती है।

नई रिसर्च से यह समझने में मदद मिलेगी कि आखिर क्यों कुछ लोगों में लक्ष्य हासिल करने की इच्छा धीरे-धीरे कम हो जाती है। भविष्य में यह जानकारी नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास में भी उपयोगी साबित हो सकती है।

जेनेटिक तकनीक से किया गया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए विशेष रूप से विकसित जेनेटिकली मॉडिफाइड Orexin-Cre चूहों का उपयोग किया। वैज्ञानिकों ने इन चूहों के मस्तिष्क में मौजूद ओरेक्सिन न्यूरॉन्स की गतिविधि को नियंत्रित कर यह देखा कि इनाम पाने के लिए वे कितनी देर तक प्रयास करते हैं।

प्रयोग के दौरान चूहों को हर बार भोजन पाने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ती थी। वैज्ञानिकों ने उस बिंदु को मापा जहां चूहे प्रयास करना छोड़ देते थे। इसे उनकी प्रेरणा का संकेत माना गया।

ब्रेन सेल्स सक्रिय होने पर बढ़ी मेहनत

जब वैज्ञानिकों ने ओरेक्सिन न्यूरॉन्स को सक्रिय किया तो चूहों ने पहले की तुलना में अधिक समय तक मेहनत जारी रखी और भोजन पाने के लिए ज्यादा प्रयास किए। वहीं जिन चूहों के इन न्यूरॉन्स को निष्क्रिय या नष्ट कर दिया गया, उन्होंने जल्दी हार मान ली और कम प्रयास के बाद ही रुक गए।

रियल-टाइम ब्रेन मॉनिटरिंग के दौरान यह भी पाया गया कि इनाम मिलने की उम्मीद बढ़ने पर इन न्यूरॉन्स की गतिविधि तेज हो जाती है। यदि अपेक्षित इनाम नहीं मिलता, तो उनकी सक्रियता बनी रहती है, जिससे लगातार प्रयास करने की प्रवृत्ति कायम रहती है।

भविष्य में नए इलाज का रास्ता खुल सकता है

शोधकर्ताओं ने ऑप्टोजेनेटिक्स तकनीक की मदद से यह भी साबित किया कि जब इन न्यूरॉन्स की गतिविधि को अस्थायी रूप से रोका गया, तो चूहों की प्रेरणा तुरंत कम हो गई। हालांकि सामान्य स्तर से अधिक सक्रिय करने पर अतिरिक्त प्रेरणा नहीं देखी गई।

वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रेरणा केवल इन न्यूरॉन्स की मात्रा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि वे मस्तिष्क के अन्य नेटवर्क के साथ किस समय और किस प्रकार सक्रिय होते हैं।

शोध दल का कहना है कि अब अगला चरण उन व्यापक ब्रेन सर्किट्स का अध्ययन करना होगा जो ओरेक्सिन न्यूरॉन्स के साथ मिलकर काम करते हैं। यदि इन तंत्रों को बेहतर ढंग से समझा जा सके, तो भविष्य में डिप्रेशन, ADHD और नशे की लत जैसी मानसिक समस्याओं के लिए अधिक प्रभावी उपचार विकसित किए जा सकते हैं।

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