MP: सुशासन का डिजिटल मॉडल, 1752 ई-सेवाओं के साथ मध्य प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य

मध्य प्रदेश ने सुशासन का डिजिटल मॉडल अपनाते हुए 1752 ई-सेवाओं के माध्यम से प्रशासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाया। राज्य देश में अग्रणी बनकर प्रशासनिक नवाचार में

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश में दूसरा स्थान हासिल करने पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार के लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है।

भोपाल: मध्य प्रदेश ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में देश में नया मुकाम हासिल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन में देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि सुशासन, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित नीतियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी और कहा कि यह सफलता सरकार के लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा है, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य नागरिकों को बेहतर, आसान और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है, और इसी दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं।

1,752 ई-सेवाओं के साथ मध्य प्रदेश बना डिजिटल अग्रणी

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश ने 1,752 से अधिक ई-सेवाएं नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई हैं। इन सेवाओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बिजली, पानी, भूमि और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई क्षेत्रों की सेवाएं शामिल हैं। डॉ. यादव ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में ई-सेवाओं का क्रियान्वयन राज्य की डिजिटल प्रगति और नवाचार क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने आगे कहा, “डिजिटल सेवाओं के विस्तार से अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे समय और मेहनत की बचत होती है और सेवाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।”

59 अनिवार्य सेवाओं का 100% क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में 59 अनिवार्य सेवाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को समय पर, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करना है। इन सेवाओं में नागरिक प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, पेंशन योजनाएं, बिजली और पानी की शिकायत निवारण जैसी सेवाएं शामिल हैं।

डॉ. यादव ने कहा, “सरकार का जोर हमेशा डिजिटल माध्यमों के जरिए सेवाओं को आसान, तेज और पारदर्शी बनाने पर रहा है। अब प्रदेश के नागरिक बिना किसी लंबी प्रक्रिया के ऑनलाइन ही आवश्यक सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। यह उपलब्धि राज्य की सुशासन दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डिजिटल गवर्नेंस: पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक

मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रगति का संकेत नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की सतत प्रयास और नवाचार पर आधारित नीति का भी प्रमाण है। डिजिटल गवर्नेंस से न केवल नागरिकों को सुविधाएं मिलती हैं, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण रहता है और सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनी रहती है। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि डिजिटल सेवाओं का विस्तार राज्य में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में संतुलित रूप से किया गया है। इससे हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं, सहायता और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मध्य प्रदेश का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बने और नागरिकों को हर सरकारी सेवा ऑनलाइन और बिना किसी बाधा के उपलब्ध हो। यह न केवल सुशासन की दिशा में कदम है, बल्कि राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में भी मददगार साबित होगा।

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