Election Commission of India द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर Supreme Court of India बुधवार को फैसला सुनाएगा।
नई दिल्ली: भारत के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया की वैधता पर अपना फैसला सुनाने जा रहा है। यह निर्णय न केवल भारतीय चुनाव प्रणाली बल्कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता पर भी व्यापक असर डाल सकता है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ यह तय करेगी कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) को संविधान और चुनावी कानूनों के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार किस सीमा तक प्राप्त है। अदालत यह भी स्पष्ट करेगी कि इस प्रक्रिया के दौरान आयोग की शक्तियों की संवैधानिक सीमा क्या है।
यह मामला इसलिए वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत में 95 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और यहां की चुनावी प्रक्रिया को दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभ्यास के रूप में देखा जाता है। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर दिया गया कोई भी न्यायिक फैसला अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी विशेषज्ञों के लिए भी अहम संदर्भ बनेगा।
क्या है SIR प्रक्रिया?
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची का विस्तृत सत्यापन करता है। इसका उद्देश्य फर्जी, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नागरिकों के नाम शामिल करना होता है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वर्तमान स्वरूप में यह प्रक्रिया मतदाता अधिकारों को प्रभावित कर सकती है और इससे वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर सत्यापन आवश्यक है।

किन कानूनी प्रावधानों पर होगी सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मुख्य रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और उससे जुड़े नियमों की व्याख्या करेगा। अदालत यह तय करेगी कि क्या इन प्रावधानों के तहत चुनाव आयोग को वर्तमान ढांचे में SIR लागू करने का अधिकार प्राप्त है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह केवल प्रक्रिया की वैधता पर फैसला करेगी, जबकि SIR अभियान को रोकने से इनकार कर दिया गया था।
कई राज्यों में पूरी हो चुकी है प्रक्रिया
अब तक बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में SIR प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। वहीं गुजरात, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने चुनाव आयोग को प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि आयोग की संवैधानिक शक्तियों की न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
इस मामले में अधिकांश याचिकाएं जून 2025 में दायर की गई थीं, जब चुनाव आयोग ने बिहार में SIR शुरू करने का निर्णय लिया था। याचिकाकर्ताओं में चुनाव सुधार संगठन, विपक्षी नेता और कई सांसद शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सत्यापन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना बड़े स्तर पर पुनरीक्षण करना लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।








