MUDA जमीन घोटाला मामला: कर्नाटक के CM सिद्धारमैया को बड़ी राहत, अदालत ने दी क्लीन चिट

MUDA जमीन घोटाला मामला: कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया को अदालत ने क्लीन चिट दी। जानिए अदालत का फैसला, मामले की पूरी कहानी और राजनीतिक असर। जांच की अनुमति

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को MUDA जमीन घोटाला मामले में बड़ी राहत मिली है। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने इस मामले में लोकायुक्त द्वारा पेश की गई ‘बी’ रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई ठोस भ्रष्टाचार का सबूत नहीं पाया।

MUDA Land Case: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को मुडा (MUDA) जमीन घोटाले में बड़ी राहत मिली है। बेंगलुरु की विशेष जनप्रतिनिधि अदालत ने इस मामले में लोकायुक्त की पेश की गई 'बी' रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। इस फैसले से मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी बीएम पार्वती को कानूनी परेशानियों से बड़ी राहत मिली है।

जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने 28 जनवरी को यह रिपोर्ट मंजूर की। लोकायुक्त ने पुलिस की जांच रिपोर्ट को सही ठहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। 28 जनवरी 2026 को जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने लोकायुक्त की रिपोर्ट को मंजूर कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सिद्धारमैया और तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। इससे मुख्यमंत्री और उनके परिवार को कानूनी मुश्किलों से बड़ी राहत मिली है।

पूरा मामला क्या है?

MUDA जमीन घोटाले का मामला साल 2021 का है। आरोप था कि मुख्यमंत्री की पत्नी बीएम पार्वती को मैसूरु के विजयनगर जैसे महंगे इलाके में 14 प्लॉट गलत तरीके से दिए गए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच की थी कि MUDA ने केसरे गांव में पार्वती की 3.16 एकड़ जमीन ली थी। आरोप था कि मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर अपनी पत्नी के नाम पर इन 14 प्लॉट्स को मुआवजे के रूप में दिलवाया।

इस मामले में कहा गया कि MUDA ने शुरुआत में यह जमीन केवल ₹3,24,700 में ली थी, जबकि बदले में दिए गए प्लॉट्स की कीमत लगभग ₹56 करोड़ बताई गई थी।

2024 में मिली जांच की अनुमति

कानूनी प्रक्रिया लंबी चली। 19 अगस्त 2024 को कर्नाटक के राज्यपाल ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून (Anti-Corruption Act) के तहत मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की अनुमति दी। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी इस अनुमति को सही माना। अदालत ने कहा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच करना जरूरी है।

हालांकि, साल 2025 की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री को राहत के संकेत मिलने लगे थे। कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल ने बताया था कि इस घोटाले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने सिद्धारमैया को क्लीन चिट दे दी। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति पीएन देसाई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार ने इस मामले में कोई गलती नहीं की।

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