Nag Panchami पर उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुले, रात 12 बजे से श्रद्धालुओं की भीड़

उज्जैन में Nag Panchami पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रात 12 बजे खुले। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और 24 घंटे तक दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट नाग पंचमी पर रात 12 बजे खोले गए। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन शुरू किए। नागचंद्रेश्वर के दर्शन का सिलसिला 24 घंटे तक जारी रहेगा।

उज्जैन: नाग पंचमी के अवसर पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर के नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट परंपरा के अनुसार रात 12 बजे खोल दिए गए। भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन शुरू किए। नाग पंचमी और सावन सोमवार एक साथ होने के कारण उज्जैन में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और मंदिर परिसर में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

रात 12 बजे खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में नाग पंचमी का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट परंपरा के अनुसार रात 12 बजे खोले गए। मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर का विधि-विधान से पूजन किया गया।

पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के दर्शन शुरू कर दिए गए। रात से ही बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचने लगे। मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में केवल एक बार नाग पंचमी के अवसर पर खोले जाते हैं। इस वजह से इस मंदिर में दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। दर्शन की प्रक्रिया लगातार 24 घंटे तक चलने की व्यवस्था है।

नाग पंचमी और सावन सोमवार का बना विशेष संयोग

इस बार नाग पंचमी के साथ सावन सोमवार होने के कारण उज्जैन के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ गई है। श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर के साथ बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भी पहुंच रहे हैं।

महाकालेश्वर मंदिर में नाग पंचमी के दिन विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा-अर्चना करते हैं और नाग प्रतिमा पर दूध अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर की प्रतिमा है खास

नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकालेश्वर मंदिर परिसर के ऊपरी हिस्से में स्थित है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती की नाग पर विराजमान दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में भगवान शिव और पार्वती के साथ भगवान गणेश और कार्तिकेय के भी दर्शन होते हैं।

मंदिर में स्थापित प्रतिमा को 11वीं शताब्दी के परमार काल से जुड़ा बताया जाता है। मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी। शेषनाग की शैय्या पर भगवान शिव और माता पार्वती के विराजमान स्वरूप के कारण इस प्रतिमा को विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है।

नाग पंचमी के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि दर्शन प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी रह सके।

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