आईटी की नौकरी छोड़कर अभिनय की राह चुनी, 60 ऑडिशन के बाद मिला पहला मौका: नैना सरीन

नैना सरीन ने आईटी की नौकरी छोड़ एक्टिंग का सपना पूरा किया। 60 ऑडिशन के बाद पहला काम मिला। उन्होंने संघर्ष, एफटीआईआई, मुंबई में करियर और आर्थिक तैयारी की

आईटी कंपनी की नौकरी छोड़कर अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली नैना सरीन ने बताया कि उन्हें पहला काम पाने के लिए 60 ऑडिशन देने पड़े। उन्होंने संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों और नए कलाकारों के लिए तैयारी की जरूरत पर जोर दिया।

बॉलीवुड: भारतीय मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना रहीं अभिनेत्री नैना सरीन ने बताया कि अभिनय की दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था। आईटी कंपनी की स्थिर नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने लंबा संघर्ष किया और लगभग 60 ऑडिशन देने के बाद उन्हें पहला पेशेवर काम मिला। उनका मानना है कि अभिनय में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि धैर्य, निरंतर प्रयास और आर्थिक तैयारी से भी मिलती है।

नैना सरीन वेब सीरीज मेड इन हेवन, त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर, राख और प्रीतम एंड पेड्रो जैसे प्रोजेक्ट्स में अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने अपने करियर, संघर्ष, परिवार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से बात की।

आईटी से अभिनय तक का सफर

नैना सरीन झारखंड के बोकारो के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उन्होंने बताया कि अभिनय में आने से पहले वह बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर के रूप में काम करती थीं। नौकरी के दौरान ही उन्होंने वॉइस ओवर, मिमिक्री और अभिनय से जुड़े कौशल सीखने शुरू किए। हालांकि उनके मन में हमेशा अभिनय को पेशे के रूप में अपनाने की इच्छा थी। उन्होंने कहा कि सीधे मुंबई आना आर्थिक रूप से संभव नहीं था। इसी दौरान उन्हें फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने प्रवेश परीक्षा की तैयारी की और चयनित होने के बाद अभिनय की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की।

परिवार ने किया पूरा समर्थन

नैना के अनुसार, रिश्तेदारों को शुरुआत में लगता था कि अभिनय केवल उनका शौक है और कुछ वर्षों बाद वह फिर से नौकरी करने लगेंगी। हालांकि उनके माता-पिता ने हमेशा उनका समर्थन किया। उन्होंने बताया कि उनकी मां ने हर कठिन दौर में उनका मनोबल बढ़ाया और उन्हें अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि परिवार का भरोसा किसी भी संघर्षरत कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है।

एफटीआईआई ने बदल दी सोच

नैना का कहना है कि एफटीआईआई ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं सिखाया, बल्कि खुद को समझने और भावनाओं को सहज रूप से व्यक्त करने की कला भी सिखाई। उन्होंने बताया कि संस्थान में बने दोस्त और वरिष्ठ कलाकार आज भी उनके पेशेवर जीवन में सहयोग करते हैं। उनके अनुसार, अभिनय की पढ़ाई के साथ वहां मिलने वाला सहयोगी माहौल किसी भी नए कलाकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

60 ऑडिशन के बाद मिला पहला काम

मुंबई आने के बाद नैना ने लगातार ऑडिशन देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि लगभग 60 ऑडिशन के बाद उन्हें पहला विज्ञापन मिला। इस विज्ञापन का निर्देशन फिल्मकार नीरज घेवान ने किया था। बाद में उन्होंने ही नैना को वेब सीरीज मेड इन हेवन में भी अभिनय का अवसर दिया। नैना का कहना है कि शुरुआती असफलताओं ने उन्हें निराश नहीं किया, बल्कि हर ऑडिशन ने उन्हें बेहतर कलाकार बनने में मदद की।

फिल्मों और वेब सीरीज में मिली पहचान

एफटीआईआई में पढ़ाई के दौरान ही नैना को अंतरराष्ट्रीय फिल्म होटल मुंबई में अभिनय का अवसर मिला, जिसमें उन्होंने ताज होटल की रिसेप्शनिस्ट की भूमिका निभाई। इसके बाद फिल्म ईब आले ऊ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। यह फिल्म कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित हुई और समीक्षकों से सराहना मिली। वेब सीरीज मेड इन हेवन और त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर में उनके अभिनय को भी दर्शकों ने पसंद किया।

छोटे किरदारों से नहीं करतीं परहेज

नैना सरीन का मानना है कि किसी भी कलाकार के लिए किरदार की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण होती है, न कि उसका स्क्रीन टाइम। उन्होंने बताया कि वह स्वयं कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहती हैं कि उन्हें हर तरह की भूमिकाओं के लिए ऑडिशन में बुलाया जाए। उनके अनुसार, यदि किरदार प्रभावशाली है तो उसका छोटा या बड़ा होना मायने नहीं रखता।

चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को अपनाने में विश्वास

वेब सीरीज राख में उनका किरदार अपेक्षाकृत छोटा था, लेकिन उन्होंने इसे इसलिए स्वीकार किया क्योंकि भूमिका भावनात्मक रूप से प्रभावशाली थी। उन्होंने यह भी बताया कि संवेदनशील दृश्यों की शूटिंग के दौरान सेट पर इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर मौजूद थे, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और पेशेवर वातावरण में पूरी हुई।

अनुभवी कलाकारों के साथ काम का अनुभव

नैना ने निर्देशक राजकुमार हिरानी और अभिनेता अरशद वारसी के साथ काम करने के अनुभव को यादगार बताया। उन्होंने कहा कि अरशद वारसी का अनुशासन और कार्यशैली प्रेरणादायक है। वहीं राजकुमार हिरानी ने उनके अभिनय की सराहना करते हुए एफटीआईआई में उनकी पढ़ाई के बारे में भी बातचीत की। इन अनुभवों ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया।

मुंबई में संघर्ष और आर्थिक तैयारी की अहमियत

नैना सरीन ने कहा कि मुंबई में करियर बनाने की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक स्थिरता होती है। उन्होंने नए कलाकारों को सलाह दी कि अभिनय के साथ-साथ अपनी आय का कोई दूसरा स्रोत भी जरूर रखें। वॉइस ओवर, लेखन, सहायक निर्देशन, फ्रीलांस कार्य या किसी अन्य नौकरी के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहना जरूरी है। उनका मानना है कि आर्थिक दबाव कम होने पर कलाकार अपने काम पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकता है।

मां के किरदार ने दी सबसे बड़ी चुनौती

नैना ने बताया कि त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर में मां का किरदार निभाना उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक था। इस भूमिका की तैयारी के लिए उन्होंने अपनी मां के व्यवहार, बॉडी लैंग्वेज और भावनाओं का गहराई से अध्ययन किया, ताकि किरदार अधिक वास्तविक लगे।

भविष्य की योजनाएं

नैना सरीन ने बताया कि उन्होंने कुछ स्वतंत्र फिल्मों की शूटिंग पूरी कर ली है। इसके अलावा वह अपनी एफटीआईआई की बैचमेट श्रेया भट्टाचार्य के साथ अपने निजी अनुभवों पर आधारित एक मिनी सीरीज भी लिख रही हैं, जिसके लिए फिलहाल निर्माता की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वह अभिनय के साथ-साथ लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय रहना चाहती हैं।

निजी जीवन पर क्या कहा?

नैना ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता केवल अभिनय और नए प्रोजेक्ट्स हैं। उन्होंने कहा कि शादी जैसे फैसले सही समय आने पर लिए जाएंगे, लेकिन इस समय उनका पूरा ध्यान अपने पेशेवर जीवन और बेहतर भूमिकाओं पर केंद्रित है।

Leave a comment