राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने नैनी झील में बढ़ती गंदगी और विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने पर चिंता जताई है। प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से झील की सुरक्षा, सफाई और पुनर्स्थापना के लिए समन्वित कार्रवाई की मांग की है।
नैनीताल: नैनी झील में बढ़ती गंदगी और संरक्षण को लेकर विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने चिंता जताई है। SALSA के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कहा कि झील की सुरक्षा केवल सफाई तक सीमित नहीं है। जलागम, ड्रेनेज, सीवरेज, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र और निर्माण गतिविधियों पर भी समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
नैनी झील के संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने नैनी झील की मौजूदा स्थिति को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। प्राधिकरण ने झील में बढ़ती गंदगी और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग विभागों के बीच चल रही खींचतान को गंभीर चिंता का विषय बताया है।

SALSA के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि नैनी झील केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि एक पूरा पारिस्थितिक तंत्र है। इसकी स्थिति जल गुणवत्ता, जलागम क्षेत्र, ड्रेनेज चैनल, सीवरेज नेटवर्क, ठोस कचरा प्रबंधन, आसपास के हरित क्षेत्रों, निर्माण गतिविधियों, यातायात और मानवीय गतिविधियों से सीधे जुड़ी हुई है।
इसी वजह से झील के संरक्षण की जिम्मेदारी किसी एक विभाग तक सीमित नहीं की जा सकती। सभी संबंधित विभागों के बीच स्पष्ट और समन्वित जवाबदेही तय करना जरूरी है।
‘झील डंपिंग मैदान नहीं बन सकती’
प्राधिकरण ने कहा कि नैनी झील दशकों से नैनीताल के निवासियों, पर्यटकों और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। झील ने कभी यह सवाल नहीं किया कि उसका संरक्षण किस विभाग की जिम्मेदारी है, इसलिए अब संबंधित विभागों को भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।
प्रदीप मणि त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि अगर झील में लगातार कचरा जाता रहा, अवैध निर्माण जारी रहे और शहर के हरित क्षेत्र कम होते गए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए नैनी झील और नैनीताल की विरासत को बचाना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि कोई सड़क हमेशा के लिए बंद नहीं रह सकती और किसी सार्वजनिक स्थान की उपेक्षा करके उसे असुरक्षित नहीं छोड़ा जा सकता। इसी तरह किसी झील को कचरा डालने की जगह नहीं बनाया जा सकता और किसी प्राकृतिक धरोहर को केवल विभागीय जिम्मेदारियों के बंटवारे की वजह से खत्म नहीं होने दिया जा सकता।
सफाई से आगे स्थायी संरक्षण पर जोर
SALSA ने झील संरक्षण के लिए केवल आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जवाबदेही तय करने और स्थायी पारिस्थितिक संरक्षण की दिशा में काम करने की जरूरत बताई है। प्राधिकरण का कहना है कि झील की सफाई के साथ उसके जलागम क्षेत्र, सीवरेज व्यवस्था, ड्रेनेज सिस्टम और आसपास के पर्यावरण पर भी ध्यान देना होगा।
पत्र में लोअर माल रोड के लंबे समय से बंद रहने और अपर माल रोड पर बढ़ती भीड़ का भी उल्लेख किया गया। इन परिस्थितियों को झील और शहर के समग्र पर्यावरणीय प्रबंधन से जोड़कर देखने की जरूरत बताई गई है।
सभी विभागों के बीच समन्वय की जरूरत
प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से उम्मीद जताई है कि वह नैनी झील संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा और सभी संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। झील की सुरक्षा, सफाई और पुनर्स्थापना के साथ आसपास के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और स्थानों को बेहतर बनाने के लिए भी कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है।
SALSA ने जल संस्थान, नगरपालिका, सिंचाई विभाग और डीडीए के बीच एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की प्रवृत्ति को झील संरक्षण के लिए बड़ा संकट बताया है। प्राधिकरण के अनुसार, नैनी झील को बचाने के लिए विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर साझा जिम्मेदारी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।











