नरेश मीणा ने बीजेपी में शामिल होने से इनकार करते हुए राजस्थान में तीसरे मोर्चे को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने रविंद्र सिंह भाटी को साथी बताया और किसान आंदोलन, डीएपी खाद, 2028 चुनाव तथा 2024 के थप्पड़ कांड पर अपनी बात रखी।
राजस्थान की राजनीति में किसान मुद्दों और आंदोलनों को लेकर सक्रिय रहे निर्दलीय नेता नरेश मीणा ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की किसी भी संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी में नहीं जाएंगे और राजस्थान में तीसरे मोर्चे को मजबूत करने की इच्छा रखते हैं। मीणा ने निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी को अपना साथी बताते हुए कहा कि दोनों अलग-अलग मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। हाल ही में नरेश मीणा किसानों को डीएपी खाद उपलब्ध कराने की मांग को लेकर नंगे पांव पदयात्रा पर निकले थे। मांगों पर सहमति बनने के बाद उन्होंने बुधवार रात जयपुर कूच का आंदोलन वापस ले लिया। हालांकि, इस आंदोलन के साथ उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
डीएपी खाद की उपलब्धता को लेकर नरेश मीणा का दावा
किसानों को डीएपी खाद मिलने में कथित परेशानी को लेकर नरेश मीणा ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन पर्याप्त खाद उपलब्ध होने की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर किसानों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है।
मीणा के मुताबिक, कुछ स्थानों पर किसानों को डीएपी के सीमित कट्टे ही दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले पांच कट्टे देने की सीमा थी, जिसे कुछ जगहों पर घटाकर दो कट्टे किए जाने की जानकारी मिली है।
उन्होंने खाद के साथ कथित तौर पर अन्य सामान खरीदने की बाध्यता को भी गंभीर मुद्दा बताया। मीणा ने आरोप लगाया कि 1,350 रुपये कीमत वाले डीएपी के कट्टे की वास्तविक लागत किसानों के लिए अतिरिक्त सामान खरीदने के कारण 2,200 से 2,300 रुपये तक पहुंच रही है।
हालांकि, ये आरोप नरेश मीणा के बयान पर आधारित हैं और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस बातचीत में नहीं हुई है।
टोंक कलेक्टर से बातचीत का वीडियो क्यों बनाया?
नरेश मीणा ने टोंक कलेक्टर टीना डाबी से फोन पर हुई बातचीत का वीडियो सार्वजनिक करने की वजह भी बताई। उनके अनुसार, कलेक्टर का फोन आने पर उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह बातचीत को ओपन स्पीकर पर रख रहे हैं।
मीणा ने कहा कि बातचीत में किसानों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन की ओर से जिस तरह चर्चा की गई, उसे उन्होंने सार्वजनिक किया। उनके मुताबिक, बातचीत सामने आने के बाद लोगों ने किसानों के हित में कही गई बातों की सराहना की।
उन्होंने टोंक प्रशासन से खाद की उपलब्धता को लेकर अधिकारियों को फील्ड में भेजने की अपील भी की। उनका सवाल था कि यदि पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है तो किसानों को वितरण केंद्रों पर लंबी कतारों में क्यों खड़ा होना पड़ रहा है।
बीजेपी में जाने से किया इनकार
राजनीतिक भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर नरेश मीणा ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता राजस्थान में एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प के निर्माण की है।
मीणा का मानना है कि राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा तीसरे मोर्चे की संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए समान विचार रखने वाले नेताओं को एक मंच पर आने की जरूरत है।
उन्होंने स्थानीय निकाय चुनावों के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि कुछ जगहों पर मतदाताओं ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के बजाय अन्य विकल्पों को समर्थन दिया है। उनके अनुसार, यही तीसरे मोर्चे की संभावनाओं का संकेत है।
रविंद्र भाटी को बताया राजनीतिक साथी
नरेश मीणा ने निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी को अपना साथी बताया। भाटी की ओर से निकाली जा रही EWS सरलीकरण यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनका एक साथी अलग मुद्दे पर संघर्ष कर रहा है।
मीणा ने भाटी की छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कई प्रभावशाली नेता छात्र राजनीति से निकलकर आगे आए हैं, लेकिन छात्र संघ चुनाव बंद होने से नई राजनीतिक नेतृत्व प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
भाटी की यात्रा और मीणा के किसान आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे भविष्य के किसी व्यापक तीसरे मोर्चे की संभावित जमीन के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, मीणा ने किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है।

किसान आंदोलन या 2028 की राजनीतिक तैयारी?
नरेश मीणा से जब पूछा गया कि किसान आंदोलन के पीछे 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी तो नहीं है, तो उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता फिलहाल किसानों के मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा कि जब किसान खाद के लिए सड़कों और वितरण केंद्रों पर संघर्ष कर रहे हों, तब उनके लिए चुनाव की तैयारी करना उचित नहीं होगा। मीणा के मुताबिक, चुनाव आने में अभी समय है और वह फिलहाल किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना चाहते हैं।
हालांकि, तीसरे मोर्चे को लेकर उनके बयानों से यह जरूर संकेत मिलता है कि राजस्थान की राजनीति में वह आने वाले वर्षों में वैकल्पिक राजनीतिक मंच को लेकर सक्रिय रह सकते हैं।
2024 के थप्पड़ कांड पर बोले- अब गांधीवादी तरीके से काम करेंगे
नरेश मीणा 13 नवंबर 2024 को टोंक जिले के समरावता गांव में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने की घटना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे।
इसी मामले को लेकर उनसे पूछा गया कि यदि भविष्य में वैसी स्थिति दोबारा बनी तो वह क्या करेंगे। मीणा ने कहा कि अब वह गांधीवादी तरीके से काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अदालत की ओर से भी कानून हाथ में नहीं लेने का निर्देश है और वह ऐसी स्थिति में पहले खुद को संयमित रखने का प्रयास करेंगे। हालांकि, उनके जवाब के अंतिम हिस्से से यह संकेत मिला कि वह भविष्य की परिस्थितियों को लेकर कोई निश्चित दावा नहीं करना चाहते।
42 मामलों और जेल में रहने का किया जिक्र
नरेश मीणा ने बातचीत में अपने खिलाफ दर्ज मामलों और जेल में बिताए समय का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि उनके खिलाफ 42 मुकदमे दर्ज हैं और थप्पड़ प्रकरण में उन्होंने करीब आठ महीने जेल में बिताए।
उन्होंने राजस्थान सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत को लेकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को वह गलत नहीं मानते। मीणा ने दावा किया कि उनके मामले में गंभीर धाराएं लगाई गईं, जबकि उनका कहना है कि घटना को लेकर मामला अपेक्षाकृत सामान्य प्रकृति का था।
इन दावों पर पुलिस और सरकारी पक्ष का विस्तृत जवाब इस बातचीत में शामिल नहीं है।
36 कौम की राजनीति पर क्या बोले मीणा?
नरेश मीणा ने कहा कि पहले उनकी राजनीति मुख्य रूप से शोषित और वंचित वर्गों के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित थी, लेकिन अब वह सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं।
उन्होंने हाड़ौती क्षेत्र की पुरानी और वर्तमान राजनीति की तुलना करते हुए नेताओं पर कथित व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। मीणा ने बजरी, गिट्टी और सड़क निर्माण से जुड़े ठेकों में राजनीतिक प्रभाव के आरोप भी लगाए।
उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश सभी समाजों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की है। इसी संदर्भ में उन्होंने बारां में जिला प्रमुख के लिए संदीप शर्मा को चेहरा बनाए जाने का उल्लेख किया और कहा कि तीसरे मोर्चे में सभी समुदायों की बराबर भागीदारी होनी चाहिए।
कांग्रेस में वापसी की संभावना पर भी दिया संकेत
बीजेपी में जाने से इनकार करने के साथ ही नरेश मीणा ने कांग्रेस के साथ भविष्य के संबंधों पर पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता तीसरे मोर्चे के माध्यम से नई राजनीति खड़ी करना होगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस में उन्हें सम्मान और उचित राजनीतिक भूमिका मिलती है तो स्थिति पर विचार किया जा सकता है। मीणा ने टिकट और राजनीतिक क्षमता के बीच संतुलन की बात करते हुए संकेत दिया कि वह भविष्य में सम्मानजनक राजनीतिक समझौते की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर रहे हैं।
नरेश मीणा के ताजा बयानों से राजस्थान की राजनीति में तीन बातें स्पष्ट होती हैं—वह फिलहाल बीजेपी में जाने के इच्छुक नहीं हैं, तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को लेकर सक्रिय हैं और किसान तथा स्थानीय मुद्दों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों का आधार बनाए रखना चाहते हैं। 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले उनका अगला राजनीतिक कदम राजस्थान की बदलती सियासत में महत्वपूर्ण हो सकता है।












